Dollar Vs Rupee: डॉलर के मुकाबले फिर ऑल-टाइम लो पर पहुंंचा रुपया, नहीं रूकी गिरावट तो बढ़ेगी आम जनता की परेशानी
भारतीय करेंसी रुपये (Rupee) में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी 10 फरवरी 2025 को भारतीय करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 44 पैसे कमजोर होकर अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं।

भारतीय करेंसी रुपये (Rupee) में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी 10 फरवरी 2025 को भारतीय करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 44 पैसे कमजोर होकर अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अब रुपये की कीमत 87.94 प्रति डॉलर हो गई है। इस गिरावट के पीछे कई आर्थिक और वैश्विक कारण हैं। अगर रुपये में जल्द तेजी नहीं आती है तो इससे आम जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है।
रुपये का नया रिकॉर्ड निचला स्तर
भारतीय रुपये में गिरावट पिछले कई महीनों से जारी है। 3 फरवरी को पहली बार इसने 87 का आंकड़ा पार किया था, और अब यह 87.94 के रिकॉर्ड लो-लेवल पर पहुंच गया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो रुपये की कीमत 100 प्रति डॉलर के स्तर को भी पार कर सकती है।
रुपये में गिरावट के प्रमुख कारण
अमेरिका की टैरिफ नीति: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ वॉर नीति रुपये की कमजोरी के पीछे एक बड़ी वजह है। शुरुआत में चीन, कनाडा और मैक्सिको के खिलाफ व्यापार शुल्क बढ़ाने के फैसले के बाद, अब अमेरिका ने स्टील और एल्यूमीनियम आयात पर 25% टैरिफ लगाने की बात कही है। इससे वैश्विक मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकालकर अमेरिकी बाजार की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जनवरी से अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 7,300 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ गया है।
डॉलर की मजबूती: डॉलर की लगातार मजबूती भी रुपये की गिरावट का एक अहम कारण है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन और बढ़ती ब्याज दरों के चलते डॉलर अन्य मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हो रहा है, जिससे भारतीय रुपये पर असर पड़ा है।
गिरावट को रोकने की जरूरत
किसी भी देश की मुद्रा का अत्यधिक कमजोर होना उसकी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय होता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। वित्त सचिव तुहिन कांत पांडे ने भी हाल ही में कहा था कि भारतीय मुद्रा एक ‘फ्री फ्लोटिंग’ करेंसी है, जिसकी कोई निश्चित विनिमय दर नहीं होती। हालांकि, लगातार गिरावट से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
रुपये की गिरावट से महंगाई पर असर
रुपये के कमजोर होने से आम जनता पर महंगाई का सीधा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का 80% कच्चा तेल आयात करता है। रुपये में गिरावट का मतलब है कि देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना है। इससे ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ेगा, जो महंगाई को और तेज कर सकता है।
इसके अलावा, विदेशों में पढ़ाई और आयातित वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। रुपये की कमजोरी के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
