SEBI की ओर बड़ा फैसला, निवेशकों पर क्या होगा असर?
शेयर ब्रोकर्स को किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगने के 48 घंटे के भीतर शेयर बाजारों को जानकारी देनी होगी। इसके अलावा उन्हें संदिग्ध गतिविधि, फ्रॉड और बाजार दुरुपयोग के मामलों पर एक Summary Analysis और एक्शन टेकेन रिपोर्ट देनी होगी।

रिटेल निवेशकों के लिए SEBI ने बड़ा फैसला लिया है। अब मार्केट रेगुलेरटर SEBI ने शेयर ब्रोकर्स को बाजार में किसी तरह की गड़बड़ी का पता लगाने और उसे रोकने के लिए नया सिस्टम बनाने का निर्देश दिया है। बाजार में इस तरह की कहावत चलती है कि शेयर पहले चलता है, खबर बाद में आती है। SEBI के नए फैसले से ट्रेडिंग के जरिए कई तरह के गलत खेल खेले जाने वाले खेल, शेयरों पर भ्रामक छवि बनाना, भाव में हेराफेरी, फ्रंट रनिंग से लेकर इनसाइडर ट्रेडिंग, मिस-सेलिंग तक पर असर देखने को मिलेगा। SEBI की इस फैसले की बारीकियां समझते हैं।
नया इंस्टीट्यूशनल मैकेनिज्म शुरू
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने एक नया इंस्टीट्यूशनल मैकेनिज्म शुरू किया है, जिसके तहत शेयर ब्रोकर्स अब बाजार में दुरुपयोग या फ्रॉड के मामलों को पता लगाने और उसकी रोकथाम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।
शेयर ब्रोकर
देखिए पहले ऐसा था कि शेयर ब्रोकर को मार्केट एब्यूज और फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए जवाबदेही संबंधित कोई रेगुलेटरी प्रावधान नहीं थे, लेकिन अब SEBI ने नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत ब्रोकर्स के लिए नया सिस्टम बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। ब्रोकरों के लिए तय Institutional Mechanism के तहत ब्रोकिंग फर्म के साथ इसके सीनियर मैनेजमेंट को मजबूत सर्विलांस और कंट्रोल सिस्टम स्थापित करने के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा।
अब यहां सवाल उठता है कि किस तरह के मामलों की होगी निगरानी?
SEBI ने धोखाधड़ी या बाजार दुरुपयोग के संभावित एग्जाम्प्ल के बारे में भी बताया है, जिनकी निगरानी के लिए ब्रोकर्स को उपाय करने की जरूरत है। इन संभावित मामलों में ट्रेडिंग की भ्रामक छवि बनाना, जैसे आप देखते हैं कि स्टॉक को लेकर एक तरह की भूमिका बार-बार बनाई जाती है, इस पर निगरानी की जाएगी। जो भाव में हेराफेरी होती है, उस भी नजर रखी जाएगी। फ्रंट रनिंग यानि संवेदनशील जानकारी के आधार पर प्रॉफिट कमाना, एक तरीके से फ्रंट रनिंग शेयरों में तेजी का फायदा उठाकर एक झटके में मोटी कमाई करने का गैर-कानूनी तरीका होता है। इसके साथ ही इनसाइडर ट्रेडिंग, मिस-सेलिंग और गलत बिक्री के जरिए अनधिकृत ट्रेडिंग शामिल हैं।
अब यहां कदम क्या उठाए जाएंगे?
शेयर ब्रोकर्स को किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगने के 48 घंटे के भीतर शेयर बाजारों को जानकारी देनी होगी। इसके अलावा उन्हें संदिग्ध गतिविधि, फ्रॉड और बाजार दुरुपयोग के मामलों पर एक Summary Analysis और एक्शन टेकेन रिपोर्ट देनी होगी। अगर ऐसी घटना नहीं होती है तो इस स्थिति में हर 6 महीने में 'निल रिपोर्ट' प्रस्तुत करनी होगी। SEBI के मुताबिक, शेयर ब्रोकिंग कंपनी को कर्मचारियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के लिए संदिग्ध धोखाधड़ी, अनुचित या अनैतिक गतिविधियों के बारे में चिंता जताने के लिए एक गोपनीय तरीका देने वाली ‘व्हिसलब्लोअर’ पॉलिसी बनानी होगी और इसे इसे लागू करना होगा। इस पॉलिसी में व्हिसलब्लोअर की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए प्रक्रियाएं स्थापित की जानी चाहिए।
मार्केट रेगुलेटर SEBI
इसके साथ ही मार्केट रेगुलेटर SEBI की ओर से म्यूल अकाउंट्स के जरिए गलत तरीके से ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। SEBI ने कहा है कि हेरफेर, धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार और व्यवहार में शामिल होने के लिए फर्जी अकाउंट्स पर नजर रखी जाएगी। Mule Accounts ऐसे बैंक खातों को कहते हैं जिसके जरिए अनैतिक रूप से कमाये गए पैसे से अकाउंट हासिल किया जाता है या उसे ट्रांसफर किया जाता है। इससे अवैध रूप से मनी ट्रांसफर करने में आसानी होती है।
