FD से आगे बढ़ रहे निवेशक: ज्यादा रिटर्न के लिए Alternative Investments की ओर रुख
भारतीय निवेशकों के लिए Fixed Deposit लंबे समय से सुरक्षित निवेश का पसंदीदा विकल्प रहा है। लेकिन टैक्स और महंगाई के असर को देखते हुए अब कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं। एक सर्वे के मुताबिक, आधे से ज्यादा FD निवेशकों ने अपने पैसे का कुछ हिस्सा Alternative Investments में लगाया है, हालांकि FD की लोकप्रियता अभी भी बनी हुई है।

In Short
- 52% FD निवेशकों ने कुछ पैसा Alternative Investments में लगाया।
- ज्यादा रिटर्न और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन बड़ी वजह रही।
- छोटे शहरों के निवेशक भी नए विकल्पों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
भारत में Fixed Deposit यानी FD लंबे समय से निवेशकों के लिए सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का भरोसेमंद विकल्प रहा है। लेकिन अब कई निवेशक अपने पैसे को सिर्फ FD तक सीमित नहीं रखना चाहते। टैक्स और महंगाई को ध्यान में रखते हुए निवेशक अपने पोर्टफोलियो में नए विकल्प जोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
Alternative investment platform Per Annum के 2026 के ऑनलाइन सर्वे के मुताबिक, FD और शेयर बाजार में पहले से निवेश कर चुके 10,000 निवेशकों में से 52% लोगों ने अपनी FD राशि का कुछ हिस्सा Alternative Investments में ट्रांसफर किया है।
सर्वे के अनुसार, इसका मुख्य कारण ज्यादा रिटर्न की तलाश और अपने निवेश पर बेहतर नियंत्रण की इच्छा है।
ज्यादा रिटर्न की तलाश बड़ी वजह
FD की सबसे बड़ी खासियत इसका तय रिटर्न और कम जोखिम है। हालांकि, निवेशक अब यह भी देख रहे हैं कि टैक्स और महंगाई के बाद उनके पैसे की वास्तविक ग्रोथ कितनी हो रही है।
इसी वजह से कुछ निवेशक Peer-to-Peer यानी P2P Lending जैसे विकल्पों में रुचि दिखा रहे हैं। इसमें निवेशक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उधार लेने वालों को पैसा देते हैं और ब्याज के जरिए कमाई कर सकते हैं।
हालांकि, P2P Lending में FD की तरह रिटर्न या भुगतान की गारंटी नहीं होती है। इसमें निवेश से जुड़े जोखिम भी होते हैं।
निवेशक FD छोड़ नहीं रहे पूरी तरह
सर्वे यह नहीं बताता कि लोग FD से पूरी तरह दूरी बना रहे हैं। करीब 35% निवेशकों ने कहा कि वे P2P Lending को FD के अतिरिक्त विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं, करीब 13% निवेशक अभी भी अपनी ज्यादातर रकम FD में रखना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें इसमें सुरक्षा और स्थिरता नजर आती है।
यह दिखाता है कि निवेशक FD को खत्म करने के बजाय अपने पोर्टफोलियो में अलग-अलग विकल्प जोड़ने की रणनीति अपना रहे हैं।
छोटे शहरों में भी बढ़ रही दिलचस्पी
Alternative Investments में रुचि सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सर्वे के मुताबिक, 62% निवेशक Tier 2 और Tier 3 शहरों से थे, जबकि 38% निवेशक Tier 1 शहरों से जुड़े थे।
डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म की आसान पहुंच के कारण छोटे शहरों के लोग भी नए निवेश विकल्पों को समझने और अपनाने लगे हैं।
कौन Alternative Investments की तलाश कर रहा है?
सर्वे में 35 से 50 साल के निवेशक सबसे बड़ा समूह रहे। इस उम्र वर्ग के निवेशकों का कुल पोर्टफोलियो मूल्य 53 करोड़ रुपये था।
18 से 35 साल के निवेशकों का पोर्टफोलियो मूल्य 21 करोड़ रुपये रहा। वहीं, सीनियर मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी 40% और बिजनेस ओनर्स की हिस्सेदारी करीब 30% रही।
कुल मिलाकर, निवेशकों का रुझान FD से पूरी तरह बाहर निकलने का नहीं, बल्कि अपने पैसे को अलग-अलग विकल्पों में बांटने का संकेत देता है। आने वाले समय में FD और Alternative Investments दोनों ही निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा बने रह सकते हैं।

