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इस कर्ज के जाल में आप तो नहीं फंस रहे हैं? चौंका देंगे आपको ये आंकड़ें!

भारतीय घरों पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसमें क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन में हो रहा इजाफा भी शामिल है। लेकिन कुल कर्ज में आधी हिस्सेदारी होम लोन की है। ये दावा केयर एज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में किया गया है।

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 कर्ज के जाल में आप तो नहीं फंस रहे हैं
कर्ज के जाल में आप तो नहीं फंस रहे हैं

भारतीय घरों पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसमें क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन में हो रहा इजाफा भी शामिल है। लेकिन कुल कर्ज में आधी हिस्सेदारी होम लोन की है। ये दावा केयर एज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में किया गया है।

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भारत में काफी समय से लोगों की बचत घटने और उनपर कर्ज बढ़ने की रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। घरों पर बढ़ते लोन को लेकर इन अलग अलग रिपोर्ट्स में चिंता भी जताई जा रही है। अब केयरएज की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि भारतीय घरों पर बढ़ते कर्ज की वजह हाउसिंग लोन में हो रहा इजाफा है। 

भारतीयों के कुल रिटेल कर्ज में होम लोन की हिस्सेदारी 50 फीसदी

केयरएज के मुताबिक भारतीयों के कुल रिटेल कर्ज में होम लोन की हिस्सेदारी 50 फीसदी है। वित्त वर्ष 2022-23 में भारत में घरों पर कर्ज बढ़कर GDP के 38 फीसदी के बराबर हो चुका था। लेकिन ये 2020-21 के 39.2 फीसदी के पीक के मुकाबले कम भी हुआ है। लेकिन इस मामूली कमी के बावजूद ये आंकड़ा दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले अभी भी ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक ब्राजील में हाउसहोल्ड लोन GDP के 35 फीसदी के बराबर है। वहीं दक्षिण अफ्रीका में घरों पर कर्ज GDP के 34 परसेंट के बराबर है। 

भारतीय घरों पर कर्ज

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय घरों पर कर्ज के भारी दबाव के बीच क्रेडिट कार्ड समेत अनसिक्योर्ड लोन में काफी इजाफा हो रहा है। इसको लेकर चिंता जताते हुए कहा गया है कि इनकी कड़ी निगरानी की जरुरत है। लेकिन कर्ज में इजाफे की मुख्य वजह होम लोन को ही माना गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे घरों की कुल बचत पर असर नहीं पड़ा है और ये GDP के 24 फीसदी के बराबर ही बनी हुई है। लेकिन अब बचत का पैटर्न बैंक डिपॉजिट की जगह रियल एस्टेट जैसे फिजिल असेट्स की तरफ शिफ्ट हो गया है। इस ट्रेंड से ये संकेत भी मिलता है कि लोगों में अब घर का मालिकाना हक हासिल करने की चाहत बढ़ रही है। इसमें निवेश को भी सुरक्षित माना जाता है क्योंकि ये महंगाई दर से ज्यादा रिटर्न देता है और इसमें कीमतों में कमी आने से जोखिम भी ना के बराबर हैं।

घरों और दूसरी प्रॉपर्टीज में लोग निवेश कर रहे

रिपो्ट में कहा गया है कि घरों और दूसरी प्रॉपर्टीज में लोग निवेश कर रहे हैं और ये खर्च नहीं माना जा सकता है। जबकि क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन जैसे कर्ज जरुरतों को पूरा करने के जरिे बनकर लोगों का बोझ बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि रियल एस्टेट पर भारतीय घरों के निवेश से इंफ्रास्ट्रक्चर को फायदा मिलता है जो आखिरकार अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में मददगार होता है। ऐसे में होम लोन को लेकर तो इस रिपोर्ट में बेफिक्री जताई गई है लेकिन अनसिक्योर्ड लोन पर इसमें चिंता जाहिर की गई है।

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