
RBI Repo Rate: महंगा होगा होम और पर्सनल लोन? ₹2.5 लाख करोड़ डालने के पीछे RBI की क्या है रणनीति
RBI ने रेपो रेट बढ़ाने के साथ बैंकिंग सिस्टम में ₹2.5 लाख करोड़ की नकदी डाली है। इस फैसले से होम और पर्सनल लोन लेने वालों के मन में कई सवाल हैं। क्या EMI बढ़ेगी और नया लोन मिलना मुश्किल होगा? एक्सपर्ट ने इसके पीछे की वजह समझाई है।

In Short
- RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया, साथ ही बैंकिंग सिस्टम में ₹2.5 लाख करोड़ की नकदी डाली।
- ब्याज दरें बढ़ने से होम और पर्सनल लोन महंगे हो सकते हैं, लेकिन लोन मिलना जरूरी नहीं कि मुश्किल हो।
- फ्लोटिंग रेट वाले लोन की EMI पर करीब तीन महीने में असर दिख सकता है, दिसंबर की MPC बैठक पर नजर रहेगी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में एक ऐसा फैसला लिया है, जिससे लोन लेने वाले लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है, तो दूसरी तरफ बैंकिंग सिस्टम में ₹2.5 लाख करोड़ की नकदी भी डाली है। ऐसे में सवाल है कि जब RBI ब्याज दरें बढ़ा रहा है, तो बैंकों को अतिरिक्त पैसा क्यों दे रहा है? क्या इससे लोन महंगा होगा या फिर लोन मिलने में भी परेशानी आएगी? लेंडिंग एक्सपर्ट जॉयदीप गुप्ता ने Business Today से बातचीत में इन सवालों के जवाब दिए हैं।
रेपो रेट बढ़ाने के बाद भी बैंकों को पैसा क्यों दे रहा RBI?
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद रेपो रेट 5.50 प्रतिशत हो गया। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी थी। इसके साथ ही RBI ने अपनी पॉलिसी का रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया।
Scienaptic AI के APAC हेड जॉयदीप गुप्ता के मुताबिक, रेपो रेट और बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाने का मकसद अलग-अलग होता है।
रेपो रेट यह तय करता है कि बैंकों के लिए पैसा कितना महंगा होगा, जबकि अतिरिक्त नकदी यह सुनिश्चित करती है कि बैंकों के पास रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त पैसा मौजूद रहे।
जॉयदीप गुप्ता ने बताया कि RBI ब्याज दरें बढ़ाने के साथ यह भी सुनिश्चित कर सकता है कि त्योहारों के दौरान किसी बैंक को नकदी की कमी का सामना न करना पड़े। हालांकि, यह अस्थायी नकदी है, स्थायी तौर पर उपलब्ध रहने वाला पैसा नहीं।
क्या अब बैंक से लोन मिलना मुश्किल होगा?
जॉयदीप गुप्ता के मुताबिक, ब्याज दरें बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि बाजार में लोन मिलना कम हो जाएगा। हालांकि, बैंक लोन देने के मामले में पहले से ज्यादा सावधानी बरत सकते हैं।
बैंक ग्राहकों की लोन चुकाने की क्षमता, पुराने रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेजों की ज्यादा बारीकी से जांच कर सकते हैं।
जिन लोगों का लोन चुकाने का रिकॉर्ड अच्छा है, उन्हें प्राथमिकता मिल सकती है। वहीं, पहली बार लोन लेने वालों और जिनकी क्रेडिट हिस्ट्री सीमित है, उन्हें ज्यादा जांच का सामना करना पड़ सकता है।

पुराने लोन की EMI पर कब पड़ेगा असर?
जॉयदीप गुप्ता के मुताबिक, जिन ग्राहकों ने फ्लोटिंग ब्याज दर पर लोन लिया है, उन पर बढ़ी हुई ब्याज दरों का असर सबसे पहले दिखाई दे सकता है।
लोन की ब्याज दर दोबारा तय होने की तारीख के आधार पर करीब तीन महीने के भीतर बदलाव देखने को मिल सकता है।
वहीं, नया लोन लेने वाले ग्राहकों को लोन मंजूर होने के समय संशोधित ब्याज दरों का सामना करना पड़ सकता है।
फिक्स्ड रेट पर लोन लेने वालों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के ग्राहकों पर इसका असर कुछ देर से दिखाई दे सकता है।
दिसंबर में RBI के फैसले पर रहेगी नजर
जॉयदीप गुप्ता के मुताबिक, रेपो रेट में सिर्फ 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी से मासिक EMI पर बहुत बड़ा असर पड़ना जरूरी नहीं है। हालांकि, आगे ब्याज दरें किस दिशा में जाती हैं, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
अब सबकी नजर RBI की अगली MPC बैठक पर रहेगी, जो 2 से 4 दिसंबर 2026 के बीच होने वाली है। इस बैठक से संकेत मिल सकते हैं कि अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने का फैसला एक बार का कदम था या आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है।

