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सोने की ज्वेलरी या लग्जरी बैग को निवेश मान रहे हैं? राधिका गुप्ता ने बताया कहां हो सकती है बड़ी गलती

सोने की ज्वेलरी हो, ₹5 लाख का लग्जरी बैग या अपना घर हर महंगी चीज निवेश नहीं होती। राधिका गुप्ता का कहना है कि असली निवेश वही है जो आपकी संपत्ति बढ़ाने के साथ जरूरत पड़ने पर आसानी से पैसे में बदला जा सके।

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असली संपत्ति के लिए जरूरत पर पैसा आसानी से मिलना जरूरी है।
असली संपत्ति के लिए जरूरत पर पैसा आसानी से मिलना जरूरी है।

In Short

  • राधिका गुप्ता ने कहा कि पोर्टफोलियो के लिए physical jewellery के बजाय financial gold पर विचार करना बेहतर हो सकता है।
  • Luxury bag की resale value बढ़ सकती है, लेकिन financial planning इस उम्मीद पर नहीं बनानी चाहिए।
  • अपना घर भावनात्मक और उपयोगी हो सकता है, लेकिन investment के तौर पर यह देखना जरूरी है कि जरूरत पर पैसा कितनी जल्दी मिल सकता है।

शादी के लिए खरीदा सोने का हार, महंगा डिजाइनर हैंडबैग या यह सोचकर खरीदा घर कि इसकी कीमत हमेशा बढ़ेगी—बहुत से लोग इन चीजों को निवेश मान लेते हैं। लेकिन Edelweiss Mutual Fund की MD और CEO राधिका गुप्ता का कहना है कि किसी चीज की कीमत बढ़ना और उसका अच्छा वित्तीय निवेश होना, दोनों एक बात नहीं हैं।

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India Today Woman Summit 2026 में उन्होंने भौतिक निवेश और वित्तीय निवेश के बीच फर्क समझाया। उनका कहना है कि निवेश की असली ताकत तभी दिखती है, जब जरूरत के समय उसे आसानी से पैसे में बदला जा सके।

सोने की ज्वेलरी और निवेश वाला सोना अलग

राधिका गुप्ता ने कहा कि उन्हें खुद ज्वेलरी पसंद है, लेकिन पोर्टफोलियो के लिए खरीदे गए सोने को अलग नजरिए से देखना चाहिए। आमतौर पर लोग अपनी सोने की ज्वेलरी आसानी से बेचना नहीं चाहते। इसके साथ रखने की सुरक्षा, स्टोरेज और मेकिंग चार्ज जैसी लागत भी जुड़ी होती है।

उनका कहना है कि अगर सोना सिर्फ निवेश के लिए खरीद रहे हैं, तो फाइनेंशियल गोल्ड जैसे गोल्ड फंड पर विचार किया जा सकता है। उनके मुताबिक सोना पूरे पोर्टफोलियो का एक हिस्सा होना चाहिए, जिसमें इक्विटी और डेट जैसे दूसरे निवेश भी शामिल हों।

₹5 लाख का हैंडबैग भी निवेश है?

महंगे लग्जरी हैंडबैग को लेकर भी राधिका गुप्ता ने सावधान किया। Chanel या Hermes जैसे कुछ बैग सेकेंडरी मार्केट में ज्यादा कीमत पर बिक सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर महंगा बैग आगे चलकर दोगुनी कीमत देगा।

उन्होंने इसे जैकपॉट जीतने जैसी संभावना बताया। उनका कहना है कि किसी की पूरी वित्तीय योजना इस उम्मीद पर नहीं बननी चाहिए कि किसी लग्जरी सामान की कीमत जरूर बढ़ेगी।

घर हमेशा निवेश नहीं होता

राधिका गुप्ता ने कहा कि भारत में घर खरीदना सिर्फ पैसों का फैसला नहीं होता, इसमें भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। अगर किसी को अपना घर खरीदने में सुरक्षा और संतुष्टि मिलती है, तो यह पूरी तरह सही फैसला हो सकता है।

लेकिन उन्होंने कहा कि अपने रहने वाले घर को अपने आप निवेश नहीं मान लेना चाहिए। जरूरत के समय हो सकता है कि आप उसे बेचना ही न चाहें। इसी वजह से कोई व्यक्ति संपत्ति के लिहाज से अमीर दिख सकता है, लेकिन उसके पास तुरंत इस्तेमाल करने के लिए नकदी कम हो सकती है।

रियल एस्टेट में सिर्फ कीमत बढ़ना काफी नहीं

अगर कोई दूसरी प्रॉपर्टी सिर्फ निवेश के मकसद से खरीदी जा रही है, तो उसके रिटर्न को दूसरे वित्तीय निवेशों की तरह देखना चाहिए।

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उन्होंने एक रिपोर्ट का उदाहरण दिया, जिसमें Amitabh Bachchan ने 2001 में खरीदा एक प्लॉट 2020 में करीब दोगुनी कीमत पर बेचा था। राधिका गुप्ता का कहना है कि सिर्फ कीमत दोगुनी होने को शानदार रिटर्न नहीं मान लेना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि इतने लंबे समय में दूसरे निवेश कितना रिटर्न दे सकते थे।

प्रॉपर्टी में किराएदार ढूंढने, प्रोजेक्ट पूरा होने का इंतजार और जरूरत के वक्त खरीदार न मिलने जैसी दिक्कतें भी होती हैं।

जरूरत के समय पैसा मिलना सबसे जरूरी

राधिका गुप्ता ने अपनी सास की एक बात साझा की। उनके मुताबिक म्यूचुअल फंड की खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर पैसा जल्दी मिल सकता है।

उन्होंने इसे “पैसे की गरिमा” बताया यानी मुश्किल समय में अपने पैसे तक पहुंचने की आजादी।

उनका संदेश साफ है: सोने की ज्वेलरी, लग्जरी बैग और प्रॉपर्टी की अपनी कीमत और अहमियत हो सकती है, लेकिन निवेश के नजरिए से यह भी देखना जरूरी है कि जरूरत के समय उस संपत्ति को कितनी आसानी से पैसे में बदला जा सकता है।

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।