कंपनी के हेल्थ कवर के बावजूद कर्मचारियों की सुरक्षा अधूरी? नई स्टडी में सामने आई बड़ी बात
कंपनी की ओर से मिलने वाले हेल्थ कवर के बावजूद कर्मचारियों की मेडिकल सुरक्षा को लेकर नई स्टडी में बड़ा अंतर सामने आया है। अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस को जरूरी मानने वाले कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है, लेकिन कई लोगों के पास अलग कवर नहीं है। नौकरी बदलने के दौरान भी हेल्थ कवर को लेकर जागरूकता कम है।

In Short
- 84% कर्मचारियों ने कंपनी के जीएमसी के अलावा अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस को जरूरी माना।
- 45% कर्मचारियों के पास कंपनी के जीएमसी के अलावा कोई अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है।
- करीब 75% कर्मचारियों को लगता है कि इमरजेंसी अस्पताल में भर्ती होने पर सिर्फ कंपनी का जीएमसी पर्याप्त नहीं होगा।
Health Insurance: कंपनी की ओर से मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस कर्मचारियों को एक बेसिक सुरक्षा देता है, लेकिन नई स्टडी में कवरेज को लेकर अंतर सामने आया है। 84% कर्मचारियों ने कहा कि कंपनी के ग्रुप मेडिकल कवर यानी जीएमसी के अलावा अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस जरूरी है। वहीं 45% कर्मचारियों ने बताया कि उनके पास कंपनी के कवर के अलावा कोई अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है।
यह जानकारी टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी की द कॉरपोरेट हेल्थ प्रोटेक्शन पल्स 2026 स्टडी में सामने आई है। इस सर्वे में मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे और कोलकाता के 28 से 55 साल की उम्र वाले 748 से ज्यादा कॉरपोरेट कर्मचारियों को शामिल किया गया। सभी कर्मचारी कंपनी की ओर से मिलने वाली जीएमसी पॉलिसी के तहत कवर थे।
अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस को जरूरी मानते हैं कर्मचारी
स्टडी के मुताबिक, 84% कर्मचारी कंपनी के जीएमसी के अलावा अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस को जरूरी मानते हैं। इसके बावजूद 45% कर्मचारियों के पास अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है।
अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस लेने में जानकारी की कमी और ‘बाद में खरीदेंगे’ वाली सोच बड़ी रुकावट के तौर पर सामने आई। यह खास तौर पर 28 से 34 साल के कर्मचारियों में देखने को मिली।
करीब 75% ने जीएमसी को बताया अपर्याप्त
करीब 75% कर्मचारियों ने माना कि इमरजेंसी में अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में सिर्फ कंपनी की ओर से मिलने वाला जीएमसी पर्याप्त नहीं होगा।
वहीं सिर्फ 41% कॉरपोरेट कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें अपने कंपनी वाले जीएमसी की सभी सुविधाओं और फायदों की पूरी जानकारी है। यानी अतिरिक्त पॉलिसी न होने के साथ-साथ कंपनी के मौजूदा कवर को समझने में भी कमी सामने आई।
मेडिकल खर्च बना बड़ी आर्थिक चिंता
स्टडी के अनुसार, 94% कर्मचारियों ने कहा कि अचानक आने वाले मेडिकल खर्च से उन्हें आर्थिक तनाव होता है। नौकरी बदलने के दौरान हेल्थकेयर खर्च सबसे बड़ी आर्थिक चिंता के रूप में सामने आया। यह आय खत्म होने और ईएमआई की जिम्मेदारी से भी आगे रहा।
नौकरी बदलने पर हेल्थ कवर को लेकर जागरूकता कम
88% कर्मचारियों ने कहा कि नौकरी बदलते समय बिना रुकावट हेल्थ इंश्योरेंस कवर जारी रहना जरूरी है। लेकिन सिर्फ 40% कर्मचारी ऐसे उपायों के बारे में जानते हैं, जो नौकरी बदलने के दौरान मेडिकल कवर जारी रखने में मदद करते हैं।
अतिरिक्त कवर चुनते समय परिवार की सुरक्षा सबसे बड़ा कारण रहा। ज्यादा सम इंश्योर्ड, परिवार के सदस्यों का कवर और नौकरी बदलने के दौरान कवर जारी रहना उन फीचर्स में शामिल रहे, जिन्हें कर्मचारी टॉप-अप प्लान चुनते समय अहम मानते हैं।
नौकरी जाने के बाद आर्थिक स्थिति
स्टडी में करीब 70% कर्मचारियों ने कहा कि नौकरी जाने के बाद वे छह महीने या उससे कम समय तक ही आर्थिक रूप से खुद को संभाल सकते हैं। वहीं सिर्फ 12% कर्मचारियों ने कहा कि वे बिना नौकरी के एक साल से ज्यादा समय तक आर्थिक रूप से टिक सकते हैं।
स्टडी के आंकड़ों में 84% कर्मचारियों ने अतिरिक्त हेल्थ इंश्योरेंस को जरूरी माना, 45% के पास अतिरिक्त कवर नहीं था, करीब 75% ने कंपनी के जीएमसी को इमरजेंसी अस्पताल में भर्ती के लिए अपर्याप्त माना और 41% को जीएमसी के सभी फीचर्स और फायदों की पूरी जानकारी थी।

