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महंगे कच्चे तेल से भारत के रुपये और बॉन्ड पर बढ़ा दबाव, RBI के कदमों से बाजार को सहारे की उम्मीद

महंगे कच्चे तेल ने भारत की करेंसी और बॉन्ड मार्केट की चिंता बढ़ा दी है। रुपये पर दबाव के बीच RBI के कदमों पर बाजार की नजर है। बढ़ती लिक्विडिटी और बॉन्ड यील्ड के बीच आने वाले दिनों में रुपये और सरकारी बॉन्ड पर क्या असर होगा, यह देखना अहम रहेगा।

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AI Generated Image

महंगे कच्चे तेल ने भारत के बॉन्ड और रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक फ्यूल का बड़ा हिस्सा आयात करने वाले भारत में ऊंची तेल कीमतों से महंगाई की चिंता बढ़ी है। मंगलवार को 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 2 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 6.79% हो गई। वहीं, रुपया 0.1% कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.4025 पर आ गया।

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ब्रेंट क्रूड बीते सोमवार को करीब 5% चढ़ने के बाद मंगलवार को 0.2% गिरकर 87.54 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। बाजार में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है।

रुपये को संभालने उतरा RBI

ट्रेडर्स के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर बेचे। पिछले कुछ हफ्तों से RBI विदेशी मुद्रा बाजार में लगातार दखल दे रहा है। हाल में शुरू की गई डॉलर डिपॉजिट योजना से मिले इनफ्लो ने भी केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाया है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक Finrex Treasury Advisors के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि ट्रेडर्स अब 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को ऐसे मुकाम के तौर पर देख रहे हैं, जहां RBI रुपये को मजबूत समर्थन दे सकता है।

RBI गवर्नर के बयान पर बाजार की नजर

बॉन्ड और करेंसी ट्रेडर्स की नजर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुंबई में बैंकिंग कॉन्फ्रेंस में सुबह 10:40 बजे होने वाले संबोधन पर है। बॉन्ड बाजार में 153 अरब रुपये की राज्य सरकारों की बॉन्ड बिक्री पर भी नजर है।

ICICI Bank के अर्थशास्त्रियों समीर नारंग और अनघा देवधर के मुताबिक, यह बिक्री केंद्रीय बैंक के कैलेंडर में तय 219 अरब रुपये से काफी कम है। इससे राज्य और केंद्र सरकार के बॉन्ड की यील्ड के बीच अंतर घटने में मदद मिल सकती है। उनका अनुमान है कि निकट अवधि में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 6.70%-6.85% के दायरे में रह सकती है।

बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी

Bloomberg Economics के एक इंडेक्स के मुताबिक, 9 अगस्त तक बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी 3.3 लाख करोड़ रुपये थी। ICICI Bank के मुताबिक, सरकार के खर्च और हालिया डॉलर डिपॉजिट योजना से आए बड़े इनफ्लो ने बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी बढ़ाई है। सरकार की कोर लिक्विडिटी 6.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है, जो मई 2022 के बाद सबसे ज्यादा है।