एक से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हैं तो जान लें नियम, क्लेम करते समय हो सकती है परेशानी
कई लोग बेहतर सुरक्षा के लिए एक से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं, लेकिन इनके नियम समझना जरूरी है। अलग-अलग पॉलिसी होने पर भी एक ही मेडिकल खर्च का दोहरा फायदा नहीं लिया जा सकता। जानिए कई हेल्थ कवर होने पर क्लेम कैसे काम करता है और किन बातों का ध्यान रखें।

In Short
- एक से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होने पर भी एक ही मेडिकल बिल का दो बार क्लेम नहीं किया जा सकता।
- इंडिविजुअल पॉलिसी, ग्रुप इंश्योरेंस और सुपर टॉप-अप कवर की अपनी अलग भूमिका होती है।
- क्लेम के समय सभी इंश्योरेंस पॉलिसी की जानकारी देना जरूरी है।
Multiple Health Insurance Policies: आज के समय में कई लोग एक से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रखते हैं। किसी के पास कंपनी की तरफ से मिलने वाला ग्रुप इंश्योरेंस होता है तो कोई अलग से इंडिविजुअल पॉलिसी या सुपर टॉप-अप कवर लेता है। हालांकि, कई पॉलिसी होने का मतलब यह नहीं है कि एक ही मेडिकल बिल को अलग-अलग जगह जमा करके ज्यादा पैसा लिया जा सकता है।
एक ही खर्च का दो बार नहीं मिल सकता पैसा
अगर किसी व्यक्ति के पास एक से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हैं तो क्लेम के नियम पॉलिसी के प्रकार पर निर्भर करते हैं। सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अस्पताल के खर्चों की भरपाई करती है, लेकिन यह पॉलिसी की शर्तों और लिमिट के हिसाब से होती है।
अगर दो इंडेम्निटी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हैं तो बीमित व्यक्ति आमतौर पर पहले किसी एक इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम कर सकता है। अगर वहां से पूरा योग्य खर्च कवर नहीं होता है तो बाकी रकम दूसरी पॉलिसी से क्लेम की जा सकती है। हालांकि, यह दूसरी पॉलिसी के नियमों के अनुसार ही होगा।
फिक्स्ड बेनिफिट पॉलिसी अलग तरीके से करती है काम
हेल्थ इंश्योरेंस में सभी पॉलिसी एक जैसी नहीं होतीं। क्रिटिकल इलनेस जैसी फिक्स्ड बेनिफिट पॉलिसी में बीमारी की स्थिति में एक तय रकम दी जाती है।
इस तरह की पॉलिसी अस्पताल के बिल की भरपाई करने वाली पॉलिसी से अलग होती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति के पास दो अलग-अलग तरह की पॉलिसी हैं तो दोनों के क्लेम नियम भी अलग हो सकते हैं।
कब फायदेमंद हो सकती हैं कई पॉलिसी
एक से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कुछ स्थितियों में उपयोगी हो सकती हैं। जैसे नौकरी करने वाले व्यक्ति के पास कंपनी का ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस हो सकता है, लेकिन नौकरी बदलने या खत्म होने के बाद सुरक्षा बनाए रखने के लिए अलग इंडिविजुअल पॉलिसी भी ली जा सकती है।
इसी तरह छोटी बेसिक पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप कवर लेने से बड़ी मेडिकल जरूरतों के समय अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है। कुछ लोग परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए अलग पॉलिसी भी लेते हैं।
क्लेम करते समय सभी पॉलिसी की जानकारी देना जरूरी
क्लेम के समय अपनी सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की जानकारी देना जरूरी होता है। दूसरी पॉलिसी या पहले मिले क्लेम की जानकारी छिपाने से परेशानी हो सकती है।
इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम प्रक्रिया के दौरान दूसरी पॉलिसी, क्लेम सेटलमेंट और पहले मिले भुगतान की जानकारी मांग सकती हैं। एक ही खर्च के लिए दो बार क्लेम करने की कोशिश गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
पॉलिसी खरीदने से पहले इन बातों को समझें
दूसरी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले सम इंश्योर्ड, डिडक्टिबल, को-पेमेंट, एक्सक्लूजन, वेटिंग पीरियड और क्लेम प्रक्रिया को समझना जरूरी है।
सिर्फ ज्यादा पॉलिसी रखना ही बेहतर सुरक्षा नहीं देता। सही पॉलिसी का चुनाव जरूरी है, जिसमें जरूरत के समय क्लेम प्रक्रिया आसान हो और खर्चों को सही तरीके से कवर किया जा सके।

