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भारत में 14.5 करोड़ से 32.9 करोड़ तक पहुंचे LPG उपभोक्ता! उज्ज्वला योजना की मदद से ऐसे बदली एलपीजी की कहानी

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण LPG आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच यह आंकड़े सामने आए हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि स्थिति नियंत्रण में है और घरेलू उपभोक्ताओं को LPG की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

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In Short

  • उज्ज्वला योजना के बाद भारत में LPG उपभोक्ताओं की संख्या 10 साल में 14.5 करोड़ से बढ़कर 32.9 करोड़ हो गई।
  • जनवरी 2026 तक PMUY के करीब 10.4 करोड़ लाभार्थी हैं और उनकी सालाना LPG खपत भी बढ़कर 4.47 सिलेंडर तक पहुंच गई।
  • भारत में LPG की कुल खपत 18 मिलियन टन से बढ़कर 30.5 मिलियन टन हो गई, जबकि आयात निर्भरता 62% तक पहुंची।

भारत में पिछले दस साल में रसोई गैस यानी LPG उपभोक्ताओं की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) का रहा, जिसे मई 2016 में गरीब परिवारों को सब्सिडी वाले LPG कनेक्शन देने के लिए शुरू किया गया था।

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पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण LPG आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच यह आंकड़े सामने आए हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि स्थिति नियंत्रण में है और घरेलू उपभोक्ताओं को LPG की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

उज्ज्वला योजना से जुड़े 10.4 करोड़ लाभार्थी

जनवरी 2026 तक PMUY के लाभार्थियों की संख्या लगभग 10.4 करोड़ तक पहुंच चुकी है। योजना के कारण LPG उपयोग में भी बढ़ोतरी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उज्ज्वला लाभार्थियों द्वारा सालाना इस्तेमाल किए जाने वाले 14.2 किलो के सिलेंडरों की औसत संख्या बढ़कर FY 2021-22 में 3.68 सिलेंडर से FY 2024-25 में 4.47 सिलेंडर हो गई है।

सरकार ने LPG को सस्ता और उपयोग को टिकाऊ बनाने के लिए मई 2022 में प्रति सिलेंडर 200 रुपये की लक्षित सब्सिडी शुरू की थी, जो साल में अधिकतम 12 रिफिल तक लागू है। बाद में अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया।

LPG की मांग आगे भी बढ़ने का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत में गैस की मांग तेजी से बढ़ेगी। एजेंसी का अनुमान है कि 2030 तक भारत की प्राकृतिक गैस मांग लगभग 60% तक बढ़ सकती है।

इस बढ़ोतरी के पीछे LNG सप्लाई में संभावित वृद्धि और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार प्रमुख वजहें हैं।

गैस इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी

IEA के मुताबिक 2019 के बाद भारत ने गैस इंफ्रास्ट्रक्चर में तेज़ी से निवेश किया है। इस दौरान देश में CNG स्टेशनों की संख्या लगभग चार गुना हो चुकी है। वहीं घरेलू गैस कनेक्शनों की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई है। इसके साथ ही गैस ट्रांसमिशन पाइपलाइन नेटवर्क में करीब 40% विस्तार किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक CNG स्टेशन और घरेलू कनेक्शन की संख्या फिर लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है, जबकि गैस ट्रांसमिशन ग्रिड करीब 50% और बढ़ सकता है।

LPG बाजार का एक नजर में हाल

2014 -2015 में भारत में कुल LPG उपभोक्ता 14.5 करोड़ थे, जो 2024-25 में बढ़कर 32.9 करोड़ हो गए हैं। इसी अवधि में LPG पहुंच 55% से बढ़कर 99% तक पहुंच गई।

वार्षिक LPG खपत भी 18 मिलियन टन से बढ़कर 30.5 मिलियन टन हो गई है। हालांकि इसके साथ आयात निर्भरता 45% से बढ़कर 62% तक पहुंच गई है।

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LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स की संख्या भी इसी दौरान 13,800 से बढ़कर 25,566 हो गई है, जो देशभर में गैस की उपलब्धता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।