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ITR Filing 2026: इन गलतियों से बचें, छोटी-सी लापरवाही पर आ सकता है टैक्स नोटिस

ITR Filing 2026 में छोटी गलती भी टैक्स नोटिस, रिफंड देरी या जांच की वजह बन सकती है। जानें रिटर्न भरते समय किन गलतियों से बचना जरूरी है।

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ITR Filing 2026
AI Image: ITR Filing 2026

In Short

  • ITR Filing 2026: इन छोटी गलतियों पर भी आ सकता है टैक्स नोटिस
  • ITR भरने से पहले चेक करें ये 8 बातें, वरना रिफंड अटक सकता है
  • फॉर्म 16 काफी नहीं, ITR में ये चूक पड़ेगी भारी
  •  ITR Filing में AIS को नजरअंदाज किया तो बढ़ सकती है परेशानी
  • नौकरी बदली है? ITR भरने से पहले यह गलती बिल्कुल न करें

आयकर रिटर्न यानी ITR दाखिल करने का सीजन शुरू हो गया है। 2026-27 के लिए लाखों वेतनभोगी कर्मचारी फॉर्म 16 डाउनलोड कर रहे हैं और दस्तावेज जुटा रहे हैं। लेकिन इस बार ITR filing को सामान्य वार्षिक प्रक्रिया मानना भारी पड़ सकता है। आयकर विभाग अब एआई, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेटेड सिस्टम की मदद से रिटर्न में दी गई जानकारी का मिलान नियोक्ता, बैंक, म्यूचुअल फंड, ब्रोकर और अन्य संस्थानों के डेटा से कर रहा है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटी चूक, गलत दावा और आय में मामूली अंतर भी नोटिस, रिफंड में देरी या जांच की वजह बन सकता है।

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कटौती का दावा तभी करें, जब दस्तावेज हों
TaxAaram.com के संस्थापक मयंक मोहनका ने ET Wealth से कहा कि "HRA का दावा करने वालों को खास सावधानी रखनी चाहिए। अगर किराया माता-पिता या रिश्तेदारों को दिया गया है, तो रेंट एग्रीमेंट, भुगतान रिकॉर्ड और सहायक दस्तावेज जरूरी हैं। विभाग ऐसे मामलों की जांच करता रहा है, खासकर जब किराया पाने वाले ने अपनी रिटर्न में वह आय नहीं दिखाई हो।" दान और अन्य छूटों पर भी यही नियम लागू होता है। ClearTax के संस्थापक और सीईओ आर्चित गुप्ता के अनुसार "धारा 80G के तहत अब लेनदेन संदर्भ संख्या और IFSC जैसी जानकारी देनी होती है। राजनीतिक चंदे में राजनीतिक दल का PAN भी मांगा जा सकता है।

सिर्फ फॉर्म 16 पर भरोसा न करें।"  कई वेतनभोगी कर्मचारी मान लेते हैं कि फॉर्म 16 सही है तो रिटर्न भी सही होगा। विशेषज्ञ इसे गलती मानते हैं। रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 16, AIS, TIS और फॉर्म 26AS का मिलान जरूरी है। Deloitte India के पार्टनर सुधाकर सेथुरमन ने ET Wealth से कहा कि "करदाता अक्सर बचत खाते के ब्याज, FD ब्याज, लाभांश आय या छोटी TDS एंट्री भूल जाते हैं। उनके अनुसार, “मामूली विसंगतियों के कारण भी स्वचालित नोटिस जारी हो सकते हैं।”


AIS, ITR फॉर्म और पूंजीगत लाभ पर सावधानी जरूरी
EY India की टैक्स पार्टनर शालिनी जैन ने कहा कि AIS में डुप्लिकेट एंट्री, गलत वर्गीकरण और देर से अपडेट जैसी चुनौतियां हो सकती हैं। इसलिए प्री-फिल्ड डेटा को आंख बंद करके स्वीकार न करें। गलत ITR फॉर्म चुनना भी जोखिम बढ़ा सकता है। विदेशी संपत्ति, विदेशी आय, कई हाउस प्रॉपर्टी या खास पूंजीगत लाभ वाले करदाता ITR-1 के पात्र नहीं हो सकते। F&O या बिजनेस गतिविधि वाले करदाताओं को ITR-3 भरना पड़ सकता है। बजट 2024 के बदलावों के बाद पूंजीगत लाभ की रिपोर्टिंग और जटिल हो गई है। कुछ मामलों में 23 जुलाई, 2024 से पहले और बाद के लेन-देन अलग-अलग दिखाने होंगे।

 
नौकरी बदली है तो दोनों फॉर्म 16 जोड़ें
अगर वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदली है, तो पुराने और नए नियोक्ता से मिली वेतन आय को जोड़कर टैक्स देनदारी दोबारा निकालें। वरना TDS कम कट सकता है और बाद में टैक्स डिमांड आ सकती है। रिटर्न दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन भी जरूरी है। जैन के अनुसार, रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर सत्यापन पूरा करना चाहिए। ऐसा न होने पर रिटर्न अमान्य माना जा सकता है। 

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।