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भारत में फिर बढ़ी चांदी की सप्लाई, अगस्त में 89.81 टन आयात; त्योहार और शादी के सीजन से पहले बढ़ेगी मांग

भारत में चांदी की सप्लाई फिर बढ़ने लगी है, लेकिन नई लाइसेंसिंग व्यवस्था और कागजी कार्रवाई अभी भी आयात की रफ्तार रोक रही है। अगस्त में महीनों बाद बड़ी खेप पहुंची है। वहीं त्योहार और शादी के सीजन से पहले मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे बाजार की तस्वीर बदल सकती है।

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AI Generated Image

In Short

  • अगस्त में इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के जरिए करीब 89.81 टन चांदी भारत पहुंची
  • करीब 400 टन चांदी आयात के लाइसेंस को मंजूरी मिलने का अनुमान
  • त्योहार और शादी के सीजन से पहले ज्वेलर्स के स्टॉक बढ़ाने से मांग तेज हो सकती है

भारत में चांदी की सप्लाई एक बार फिर बढ़ने लगी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, नई लाइसेंसिंग व्यवस्था के बाद आयात में आई रुकावट के बावजूद कारोबारी अब ज्यादा चांदी देश में लाने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय बाजार में ग्लोबल कीमतों के मुकाबले ज्यादा भाव मिलने से कारोबारियों को अच्छा प्रीमियम मिल रहा है। हालांकि लाइसेंस मिलने के बाद भी कागजी कार्रवाई, कस्टम्स क्लीयरेंस और शिपिंग से जुड़ी दिक्कतें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ऐसे में अब समझना जरूरी है कि चांदी की सप्लाई कितनी सुधरी है, प्रीमियम पर क्या असर पड़ा है और आगे त्योहारों और शादियों के सीजन में मांग कैसी रह सकती है।

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अगस्त में 89.81 टन चांदी पहुंची भारत

कई कारोबारियों और बैंकों ने हाल में चांदी आयात करने के लिए लाइसेंस हासिल किए हैं। इसके बाद अगस्त में गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी में मौजूद इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के जरिए करीब 89.81 टन चांदी भारत लाई गई। इससे पहले लगातार छह महीने तक इस प्लेटफॉर्म के जरिए कोई चांदी आयात नहीं हुई थी।

भारत दुनिया में चांदी की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में शामिल है और अपनी जरूरत का लगभग पूरा हिस्सा विदेशी सप्लाई से पूरा करता है। यही वजह है कि भारत में लोकल कीमतें जब ग्लोबल कीमतों से ऊपर जाती हैं तो कारोबारियों के लिए यहां चांदी बेचना ज्यादा फायदेमंद हो जाता है।

करीब 400 टन के लाइसेंस को मिली मंजूरी

मेटल्स फोकस लिमिटेड के प्रिंसिपल कंसल्टेंट हर्षल बरोट के मुताबिक जुलाई के मुकाबले चांदी की उपलब्धता में सुधार आया है। उनका मानना है कि करीब 400 टन चांदी के आयात के लिए लाइसेंस को मंजूरी मिल चुकी है।

सप्लाई बढ़ने से भारत में लोकल और ग्लोबल चांदी की कीमतों के बीच प्रीमियम कुछ कम हुआ है। हालांकि मेटल्स फोकस के मुताबिक शुक्रवार तक इसका 30 दिन का औसत करीब 4 डॉलर प्रति औंस बना हुआ था। यानी प्रीमियम अभी भी इतना है कि कारोबारियों के लिए भारत में चांदी भेजना फायदेमंद बना हुआ है।

मई में लागू हुई थी नई लाइसेंसिंग व्यवस्था

भारत ने मई में चांदी के आयात पर लाइसेंस की जरूरत लागू की थी। इसका मकसद फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को बचाना था। इसके बाद चांदी की खेप तेजी से गिर गई थी और आयात देश की कुल मांग के मुकाबले बहुत कम रह गया था।

अब लाइसेंस जारी होने के बावजूद चांदी की खेप पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। बाजार से जुड़े कई लोग समय पर लाइसेंस से जुड़े जरूरी दस्तावेज हासिल नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी वजह से आयात की प्रक्रिया में देरी हो रही है।

हर खेप के साथ चाहिए नया सर्टिफिकेट

नई व्यवस्था के तहत चांदी की हर खेप के साथ ऐसा सर्टिफिकेट देने की उम्मीद है, जिससे यह साबित हो कि चांदी किस देश में तैयार हुई है। हर्षल बरोट के मुताबिक मेटल कहां से आया है, इसकी जानकारी आम तौर पर शिपिंग दस्तावेजों में होती है, लेकिन किसी सरकारी संस्था की ओर से जारी औपचारिक सर्टिफिकेट की मांग एक नई शर्त है।

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उनके मुताबिक ऐसी व्यवस्था आम तौर पर तभी देखने को मिलती है जब आयात किसी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत किया जा रहा हो। इसी अतिरिक्त कागजी कार्रवाई की वजह से कई कारोबारी अभी भी कस्टम्स से चांदी की खेप क्लीयर नहीं करा पा रहे हैं।

सही दस्तावेज देने वाले देशों को मिल रही प्राथमिकता

कागजी कार्रवाई में हो रही देरी के कारण कारोबारी अब उन देशों से चांदी खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जहां जरूरी दस्तावेज जल्दी मिल सकते हैं। इससे शिपिंग और कस्टम्स क्लीयरेंस की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

हालांकि लाइसेंस मिल जाना ही काफी नहीं है। चांदी की शिपिंग, कस्टम्स क्लीयरेंस और रिफाइनिंग से जुड़ी लॉजिस्टिक्स में भी कई हफ्ते लग सकते हैं। इसलिए सप्लाई में जो सुधार दिख रहा है, वह अभी पूरी तरह तेज और सामान्य रफ्तार में नहीं बदला है।

त्योहार और शादी के सीजन से बढ़ सकती है मांग

ऑगमोंट एंटरप्राइज लिमिटेड की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनिशा चैनानी के मुताबिक साल के आगे आने वाले त्योहार और शादी के सीजन से पहले ज्वेलर्स अपना स्टॉक दोबारा भरना शुरू कर सकते हैं। इससे चांदी की मांग और बढ़ सकती है।

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उनके मुताबिक फिलहाल बाजार काफी हद तक पहले से मौजूद स्टॉक और धीरे-धीरे आ रही सप्लाई पर चल रहा है। यानी लाइसेंस की मंजूरी बढ़ने के बावजूद चांदी के आयात की रफ्तार अभी पूरी तरह नहीं सुधरी है। अब आने वाले महीनों में नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ती मांग के बीच सप्लाई कितनी तेजी से सामान्य हो पाती है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।