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वित्तीय संकत के समय कैसे सुरक्षित रखें अपना गोल्ड इन्वेस्टमेंट?

मार्च में सोना और चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को झटका लगा। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और लंबी अवधि में सोना बेहतर रिटर्न दे सकता है। निवेशकों को घबराने के बजाय संतुलित निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।

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AI Generated Image

In Short

  • मार्च में सोना 13% और चांदी 26% गिरकर निवेशकों को बड़ा झटका दे गए
  • मजबूत डॉलर और ब्याज दर कटौती की उम्मीद कमजोर होने से दबाव बना
  • एक्सपर्ट्स बोले, लंबी अवधि में सोना मजबूत रहेगा, घबराने की नहीं जरूरत

मार्च महीने में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को झटका दिया था। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतें 13% से ज्यादा गिर गईं, जबकि चांदी में करीब 26% की भारी गिरावट आई। सितंबर 2011 के बाद यह सोने और चांदी की सबसे खराब मंथली गिरावट रही।

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यह गिरावट ऐसे समय आई जब अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ीं।

कैसी रणनीति अपनाएं?

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि सोने को रिटर्न देने वाले निवेश की तरह नहीं, बल्कि सुरक्षा देने वाले एसेट की तरह देखना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि संकट के समय निवेशकों को लिक्विडिटी, सही एसेट अलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, ETF या स्टैंडर्ड गोल्ड कॉइन जैसे आसानी से बेचने योग्य ऑप्शन ज्यादा फायदेमंद रहते हैं।

शॉर्ट टर्म गिरावट, लेकिन रिकवरी का इतिहास

SEBI-रजिस्टर्ड एनालिस्ट और Lifelong Wealth के फाउंडर हरिप्रसाद ने कहा कि इतिहास बताता है कि लिक्विडिटी संकट में सोना दबाव में आता है, लेकिन अनिश्चितता बढ़ने पर तेजी से रिकवर भी करता है। उन्होंने 2008 के वित्तीय संकट और COVID-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि सोना लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन करता है।

SGB vs ETF: क्या है बेहतर ऑप्शन?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ कितना सोना रखना है, यह जरूरी नहीं, बल्कि किस फॉर्म में रखना है, यह ज्यादा अहम है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि इन्हें सरकारी समर्थन मिलता है और इनमें फिक्स्ड रिटर्न भी मिलता है। लेकिन ये उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जिन्हें तुरंत पैसे की जरूरत नहीं होती।

वहीं Gold ETFs और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स लिक्विडिटी, ट्रांसपेरेंसी और आसानी से खरीद-बिक्री की सुविधा देते हैं, जो संकट के समय काफी अहम साबित होती है।

फिजिकल गोल्ड की भी अपनी भूमिका

फिजिकल गोल्ड कम लिक्विड जरूर है, लेकिन यह चरम संकट में काम आता है, जब वित्तीय सिस्टम प्रभावित हो सकता है। पोनमुडी का सुझाव है कि निवेशकों को फिजिकल और फाइनेंशियल गोल्ड के बीच संतुलन रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर पैसा भी मिले और सुरक्षा भी बनी रहे।

घबराहट से बचें, संतुलन बनाएं

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अनियमित डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स में जोखिम हो सकता है। निवेशकों को केवल रेगुलेटेड और पारदर्शी विकल्पों पर भरोसा करना चाहिए।

हरिप्रसाद के मुताबिक सोने को केवल रखने का एसेट नहीं, बल्कि काउंटर-साइक्लिकल टूल समझना चाहिए। बाजार में घबराहट के समय रीबैलेंसिंग करना ही समझदारी है।

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