सोना खरीदें या शेयर बाजार में लगाएं पैसा? जानिए नए संवत में कहां मिलेगा बेहतर रिटर्न
नए संवत 2083 में निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि सोने-चांदी में पैसा लगाएं या शेयर बाजार में निवेश करें। गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच एक्सपर्ट्स इक्विटी में बेहतर मौके देख रहे हैं।

नए संवत 2083 की शुरुआत के साथ निवेशकों के सामने एक बड़ा सवाल है कि आखिर पैसा कहां लगाया जाए? सोना और चांदी जैसे कीमती मेटल्स में निवेश करना बेहतर रहेगा या शेयर बाजार में पैसा लगाने का सही समय आ गया है? पिछले कुछ समय में गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वहीं, भारतीय शेयर बाजार भी पिछले दो साल से दबाव में रहा है।
सोना या शेयर बाजार कहां लगाएं पैसा?
बिजनेस टुडे टीवी पर चर्चा के दौरान सीनियर एंकर गीतु मोज़ा ने कहा कि उनके मुताबिक, इस समय निवेशकों को इक्विटी यानी शेयर बाजार की तरफ ध्यान देना चाहिए। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पिछले दो साल में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल सोने ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया था, लेकिन अब इसकी कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए वह शेयर बाजार में निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं।
सोने और चांदी की कीमतों में क्यों बढ़ी चिंता?
गीतु मोज़ा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,500 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर से गिरकर करीब 4,000 डॉलर पर आ गई है।
वहीं, चांदी में भी पिछले साल अच्छी तेजी देखने को मिली थी, लेकिन इसके बाद कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। चांदी वापस 50 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है।
उनका कहना है कि सोने और चांदी जैसी कमोडिटीज में इस तरह का उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर है।
लार्जकैप शेयरों में बन सकते हैं अच्छे मौके?
गीतु मोज़ा ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछले दो साल ज्यादा अच्छे नहीं रहे हैं। हालांकि, अब लार्जकैप कंपनियों के शेयर वैल्यूएशन के लिहाज से आकर्षक नजर आ रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इन कंपनियों की कमाई के आंकड़े भी निवेशकों की दिलचस्पी बनाए हुए हैं।
नए संवत में निवेश की क्या हो रणनीति?
चर्चा के दौरान मजबूत बैलेंस शीट, कंपनियों की कमाई और उचित वैल्यूएशन पर भी जोर दिया गया। गीतु मोज़ा का मानना है कि मौजूदा समय में सोने और चांदी के मुकाबले इक्विटी में बेहतर अवसर नजर आ रहे हैं। हालांकि, यह उनका बाजार को लेकर आकलन है, किसी निवेश पर निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं।

