पहली बार घर खरीदने वालों से बदलेगा भारत का हाउसिंग मार्केट; युवाओं की बढ़ती कमाई और सेविंग्स बनी बड़ी वजह
भारत के हाउसिंग मार्केट में पहली बार घर खरीदने वालों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती इनकम ड्यूल इनकम फैमिली महंगे किराए और होम लोन की आसान समझ ने युवाओं को घर खरीदने के लिए प्रेरित किया है। आने वाले वर्षों में अफोर्डेबल हाउसिंग इस डिमांड को आगे बढ़ा सकती है।

In Short
- बढ़ती कमाई और सेविंग्स के चलते युवा पहली बार घर खरीदने के लिए तैयार हो रहे हैं।
- गुरुग्राम बेंगलुरु मुंबई और हैदराबाद में महंगे किराए ने होमओनरशिप की सोच को मजबूत किया है।
- अफोर्डेबल हाउसिंग की उपलब्धता तय करेगी कि यह डिमांड कितने लंबे समय तक बनी रहेगी।
भारत के हाउसिंग मार्केट में अब पहली बार घर खरीदने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। युवा प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी के शुरुआती सात से 10 साल पूरे कर चुके हैं, जिससे उनकी कमाई और सेविंग्स दोनों बढ़ी हैं। ड्यूल इनकम फैमिली और महंगे किराए ने भी घर खरीदने की सोच को मजबूत किया है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में युवा होमओनरशिप को अपनी अगली बड़ी जरूरत मान रहे हैं।
कमाई बढ़ने से घर खरीदना हुआ आसान
Orbit Project Consultants India Pvt Ltd के Founder और Managing Director Ishaan Ghai के अनुसार, आज के युवा प्रोफेशनल्स के पास पहले के मुकाबले ज्यादा फाइनेंशियल स्थिरता है। नौकरी के कई साल पूरे होने के बाद उनकी इनकम बढ़ी है और सेविंग्स भी जमा हुई हैं।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में दो लोग कमाते हैं उनके लिए घर खरीदने का फैसला पहले से ज्यादा आसान हो गया है। जो घर कभी नौकरी शुरू करने के समय दूर का सपना लगता था अब वह एक रियलिस्टिक फैसला बनता जा रहा है।
महंगे किराए ने बढ़ाई घर खरीदने की सोच
गुरुग्राम, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में किराया काफी ज्यादा हो गया है। कई जगहों पर लोगों को हर महीने ₹40,000 से ₹50,000 तक किराया देना पड़ रहा है।
ऐसे में कई लोग सोच रहे हैं कि अगर इतनी बड़ी रकम हर महीने किराए में जा रही है तो क्यों न इसी पैसे से अपना घर खरीदने की दिशा में कदम बढ़ाया जाए। यह सोच पहली बार घर खरीदने वालों की संख्या बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है।
होम लोन और फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की बढ़ी समझ
नई पीढ़ी फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक है। युवा अब क्रेडिट स्कोर, EMI और होम लोन की शर्तों को समझते हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से वे अलग-अलग लोन विकल्पों की तुलना कर सकते हैं और अपनी लोन लेने की क्षमता का अंदाजा पहले ही लगा सकते हैं। इससे होम लोन लेने का डर भी कम हुआ है।
कोरोना के बाद बदली घर की जरूरत
कोरोना महामारी के दौरान लंबे समय तक घर में रहने के बाद लोगों की हाउसिंग जरूरतें बदल गई हैं। अब खरीदार सिर्फ एक घर नहीं बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल चाहते हैं।
अलग कमरा, बालकनी, खुली जगह, सिक्योरिटी, कॉमन एरिया और अच्छी लोकेशन जैसी चीजें घर खरीदते समय ज्यादा महत्व रखने लगी हैं।
बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ा नए इलाकों का आकर्षण
मेट्रो नेटवर्क, एक्सप्रेसवे और बेहतर रोड कनेक्टिविटी ने घर खरीदने के विकल्प बढ़ा दिए हैं। अब लोग शहर के मुख्य इलाकों से दूर भी घर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं।
अगर किसी जगह पर अच्छी कनेक्टिविटी है तो लोग वहां बड़े और बेहतर घर कम कीमत में खरीदने को तैयार हैं। इससे शहरों के आसपास के इलाकों में भी डिमांड बढ़ रही है।
अफोर्डेबल हाउसिंग बनी सबसे बड़ी जरूरत
हालांकि बढ़ती कीमतें अभी भी पहली बार घर खरीदने वालों के लिए बड़ी चुनौती हैं। हाउसिंग प्राइस में तेज बढ़ोतरी के कारण कई खरीदारों के बजट में सही घर मिलना मुश्किल हो रहा है।
Ishaan Ghai के अनुसार, प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग की ज्यादा सप्लाई के बीच अफोर्डेबल हाउसिंग की जरूरत सबसे बड़ा मौका है। अगर डेवलपर्स अच्छी लोकेशन पर सही कीमत वाले घर उपलब्ध कराते हैं तो यह डिमांड लंबे समय तक बनी रह सकती है।
पहली बार घर खरीदने वाले युवाओं की यह नई लहर भारत के हाउसिंग मार्केट को आने वाले कई सालों तक मजबूती दे सकती है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि बाजार खरीदारों के बजट और जरूरतों के हिसाब से घर उपलब्ध कराए।

