
दिवाली-धनतेरस पर सोने में निवेश का है प्लान? Digital Gold या Gold ETF, जानिए कहां पैसा लगाना बेहतर
दिवाली और धनतेरस पर सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो Digital Gold और Gold ETF आपके लिए दो विकल्प हो सकते हैं। लेकिन क्या दोनों में निवेश करना एक जैसा है? लागत, सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने के नियमों में ऐसे अंतर हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।

In Short
- दिवाली-धनतेरस पर Digital Gold और Gold ETF निवेश के दो विकल्प।
- Digital Gold में छोटी रकम से भी खरीद सकते हैं सोना।
- Gold ETF को SEBI रेगुलेट करता है, दोनों की लागत और सुरक्षा में अंतर।
दिवाली और धनतेरस के मौके पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। पहले लोग ज्यादातर सोने की ज्वेलरी, सिक्के या गोल्ड बार खरीदते थे, लेकिन अब निवेश के तरीके बदल रहे हैं। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड भी निवेशकों के बीच विकल्प बनकर उभरे हैं। दोनों के जरिए बिना फिजिकल सोना खरीदे गोल्ड में निवेश किया जा सकता है। हालांकि, इनमें लागत, पैसे निकालने की सुविधा और निवेशकों की सुरक्षा को लेकर कई अंतर हैं।
डिजिटल गोल्ड का बढ़ रहा बाजार
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट 'Digital Gold: Unlocking a $700-Billion Opportunity' के मुताबिक, दुनियाभर में डिजिटल गोल्ड का बाजार करीब 45 से 55 अरब डॉलर का है। वहीं, गोल्ड आधारित ETF का बाजार लगभग 600 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल गोल्ड के विस्तार में भरोसा, निवेश की सुविधा, प्रोडक्ट की उपयोगिता और कीमत जैसे फैक्टर अहम भूमिका निभाएंगे।
Digital Gold में कैसे होता है निवेश?
डिजिटल गोल्ड के जरिए निवेशक छोटी रकम से भी सोना खरीद सकते हैं। भारत में Paytm, PhonePe और Google Pay जैसे प्लेटफॉर्म ने डिजिटल गोल्ड को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद की है।
इसमें खरीदा गया सोना संबंधित प्रोवाइडर की कस्टडी में रखा जाता है। हालांकि, निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि सोना कहां रखा जा रहा है, कौन-कौन से चार्ज लगेंगे और जरूरत पड़ने पर फिजिकल गोल्ड कैसे मिलेगा।
इसके अलावा, अगर सर्विस देने वाली कंपनी वित्तीय मुश्किल में फंसती है, तो निवेशक को क्या सुरक्षा मिलेगी, यह समझना भी जरूरी है।

Gold ETF में निवेश कैसे होता है?
गोल्ड ETF के जरिए निवेशक शेयर बाजार में ट्रेड होने वाली यूनिट्स खरीदकर सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव का फायदा उठा सकते हैं। इसके लिए आमतौर पर डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है।
निवेशक बाजार खुलने के दौरान ETF यूनिट्स खरीद या बेच सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग ETF में लिक्विडिटी और खरीद-बिक्री की कीमतों का अंतर अलग हो सकता है।
निवेश से पहले एक्सपेंस रेशियो, ब्रोकरेज चार्ज, ट्रैकिंग एरर और ट्रेडिंग लिक्विडिटी की तुलना करनी चाहिए। आम निवेशक सामान्य तौर पर ETF यूनिट्स को एक्सचेंज पर बेचते हैं, न कि फिजिकल गोल्ड में बदलते हैं।
किसमें मिलती है ज्यादा सुरक्षा?
डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF के बीच एक बड़ा अंतर निवेशकों की सुरक्षा का है। डिजिटल गोल्ड खरीदते समय प्रोवाइडर की शर्तों, गोल्ड बैकिंग और रिडेम्पशन नियमों को समझना जरूरी है।
वहीं, गोल्ड ETF म्यूचुअल फंड के तय ढांचे के तहत आते हैं और इन्हें बाजार नियामक SEBI रेगुलेट करता है। हालांकि, ETF में भी सोने की कीमत घटने पर नुकसान हो सकता है।
दिवाली-धनतेरस पर कौन सा विकल्प बेहतर?
अगर आप छोटी रकम से आसानी से सोना खरीदना चाहते हैं, तो डिजिटल गोल्ड सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। वहीं, शेयर बाजार के जरिए सोने में निवेश करने वालों के लिए गोल्ड ETF बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
हालांकि, सिर्फ खरीदारी की सुविधा देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। दिवाली और धनतेरस पर सोना खरीदने से पहले कुल लागत, लिक्विडिटी, निवेश का उद्देश्य और सुरक्षा से जुड़े नियमों की तुलना करना जरूरी है।

