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क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाना भूल गए तो क्या होगा, बैंक की कार्रवाई और नियम समझें

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ने के साथ बिल भुगतान में देरी के मामले भी सामने आते हैं। कई लोग सोचते हैं कि बिल न भरने पर जेल हो सकती है, लेकिन नियमों के मुताबिक सिर्फ भुगतान न कर पाने पर ऐसा नहीं होता। जानिए बैंक की कार्रवाई और जरूरी नियम।

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AI Generated Image

In Short

  • क्रेडिट कार्ड बिल न भरने पर तुरंत जेल नहीं होती इसे आमतौर पर सिविल डिस्प्यूट माना जाता है।
  • भुगतान न होने पर बैंक रिमाइंडर भेज सकता है और रिकवरी एजेंट के जरिए संपर्क कर सकता है।
  • क्रेडिट कार्ड खर्च को कंट्रोल करने के लिए 30 फीसदी लिमिट इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

आज के समय में डेबिट कार्ड की तरह क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है। लोग शॉपिंग से लेकर रोजमर्रा के खर्चों तक के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें पहले खर्च किया जा सकता है और भुगतान बाद में करना होता है। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड पर रिवॉर्ड प्वाइंट और कैशबैक जैसे फायदे भी मिलते हैं।

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लेकिन कई बार किसी वजह से लोग समय पर क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चुका पाते हैं। ऐसे में मन में सवाल आता है कि क्या बिल न भरने पर जेल हो सकती है। आइए जानते हैं कि ऐसी स्थिति में क्या होता है।

बिल नहीं भरने पर क्या बैंक कार्रवाई करता है?

अगर क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है तो केवल इस वजह से जेल नहीं होती। क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान न करना आमतौर पर सिविल डिस्प्यूट माना जाता है। ऐसी स्थिति में पुलिस सीधे गिरफ्तार नहीं करती।

सबसे पहले बैंक या वित्तीय संस्थान की ओर से ग्राहक को भुगतान के लिए रिमाइंडर भेजे जाते हैं। ये रिमाइंडर मैसेज या ईमेल के जरिए भेजे जा सकते हैं।

रिकवरी एजेंट कर सकते हैं संपर्क

अगर रिमाइंडर के बाद भी बिल का भुगतान नहीं किया जाता है तो बैंक की ओर से रिकवरी एजेंट के जरिए संपर्क किया जा सकता है। उनका मकसद बकाया रकम का भुगतान करवाना होता है।

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अगर इसके बाद भी भुगतान नहीं होता है तो मामला सिविल कोर्ट तक पहुंच सकता है।

किन हालात में हो सकती है जेल?

सिर्फ क्रेडिट कार्ड बिल न भर पाने पर जेल नहीं होती। हालांकि अगर कोर्ट में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर भुगतान नहीं किया और शुरुआत से ही भुगतान करने की मंशा नहीं थी, तो मामला अलग हो सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

ऐसी स्थिति में कार्रवाई डिफॉल्ट से जुड़े मामले में हो सकती है, न कि सामान्य सिविल डिस्प्यूट के आधार पर।

क्रेडिट कार्ड खर्च को कैसे करें कंट्रोल?

क्रेडिट कार्ड कंपनियां ग्राहकों को लाखों रुपये तक की लिमिट देती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी लिमिट का इस्तेमाल कर लिया जाए।

क्रेडिट कार्ड खर्च को संभालने के लिए 30 फीसदी नियम अपनाया जा सकता है। यानी कार्ड की कुल लिमिट का केवल 30 फीसदी तक ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

अगर आप लिमिट का बहुत ज्यादा हिस्सा खर्च कर देते हैं तो बाद में बिल चुकाने में परेशानी हो सकती है। इसलिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सोच समझकर करना जरूरी है ताकि भुगतान का बोझ न बढ़े।

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Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।