नई हेल्थ पॉलिसी लेने की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, पहले जान लें ये जरूरी बात
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होने के बावजूद पहले से तय सर्जरी का खर्च तुरंत कवर हो यह जरूरी नहीं है। वेटिंग पीरियड और पॉलिसी स्विचिंग के नियम इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई पॉलिसी लेने से पहले कवरेज की लिखित पुष्टि जरूर लें।

In Short
- पहले से तय सर्जरी पर वेटिंग पीरियड लागू हो सकता है
- Zero Waiting Period पॉलिसी में भी हर इलाज तुरंत कवर नहीं होता
- पुरानी पॉलिसी बंद करने से पहले नई पॉलिसी का कवरेज लिखित में जांचें
हेल्थ इंश्योरेंस लेने के बाद भी कई बार पॉलिसीधारकों को तुरंत इलाज का पूरा कवर नहीं मिलता। खासकर तब जब पॉलिसी खरीदने से पहले ही किसी सर्जरी या इलाज की जरूरत का पता हो। ऐसे मामलों में वेटिंग पीरियड बड़ी भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पॉलिसी बदलने से पहले यह समझना जरूरी है कि संबंधित बीमारी या सर्जरी पर कौन सा वेटिंग पीरियड लागू है और कवरेज कब से शुरू होगा।
सर्जरी पर लागू हो सकता है वेटिंग पीरियड
ManipalCigna Health Insurance के हेड प्रोडक्ट डेवलपमेंट Vineet Gupta के मुताबिक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में वेटिंग पीरियड होना सामान्य बात है। किसी पहले से तय सर्जरी पर प्री एग्जिस्टिंग डिजीज वेटिंग पीरियड लागू हो सकता है। इसके अलावा कुछ खास बीमारियों और मेडिकल प्रक्रियाओं के लिए अलग स्पेसिफिक वेटिंग पीरियड भी हो सकता है।
Gupta के मुताबिक मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में ऐसे वेटिंग पीरियड 36 महीने से ज्यादा नहीं हो सकते। पॉलिसीधारक को अपने इंश्योरर से लिखित में यह पता करना चाहिए कि उसकी सर्जरी पर कौन सा वेटिंग पीरियड लागू है और किस तारीख से इलाज कवर होगा।
Zero Waiting Period वाली पॉलिसी भी तुरंत समाधान नहीं
कई पॉलिसियां Zero Waiting Period या No Waiting Period के नाम से उपलब्ध होती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पहले से पता बीमारी या पहले से तय सर्जरी अपने आप कवर हो जाएगी।
नई इंश्योरेंस कंपनी मेडिकल रिपोर्ट्स सलाह और प्रस्तावित सर्जरी की जानकारी देखकर कवरेज पर फैसला कर सकती है। कंपनी कुछ शर्तों के साथ कवर दे सकती है अतिरिक्त प्रीमियम मांग सकती है को पेमेंट लगा सकती है या नया वेटिंग पीरियड लागू कर सकती है। कुछ मामलों में आवेदन खारिज भी किया जा सकता है।
इसलिए पॉलिसी बदलने से पहले पूरी मेडिकल हिस्ट्री बताना और संबंधित बीमारी सर्जरी और उससे जुड़े खर्चों के कवर की लिखित पुष्टि लेना जरूरी है।
बीच में पॉलिसी बदलना पड़ सकता है भारी
Gupta के मुताबिक सिर्फ आने वाली सर्जरी को कवर कराने के लिए पॉलिसी बदलते समय सावधानी जरूरी है। पोर्टेबिलिटी आमतौर पर रिन्यूअल के समय होती है और इसमें पुरानी पॉलिसी में पूरा किया गया वेटिंग पीरियड क्रेडिट आगे ले जाने का फायदा मिल सकता है।
लेकिन मौजूदा पॉलिसी बंद करके नई पॉलिसी लेने पर वेटिंग पीरियड दोबारा शुरू हो सकता है। इससे सर्जरी कवर से बाहर रह सकती है। साथ ही कंटिन्युटी बेनिफिट प्रभावित हो सकते हैं और कवरेज में अस्थायी गैप भी आ सकता है।
पुरानी पॉलिसी जारी रखना हो सकता है बेहतर
अगर पॉलिसीधारक अपने मौजूदा वेटिंग पीरियड का बड़ा हिस्सा पूरा कर चुका है तो उसी पॉलिसी को जारी रखना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। रिन्यूअल के समय दूसरी पॉलिसियों की तुलना करके पोर्टेबिलिटी पर विचार किया जा सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि नई पॉलिसी जारी होने उसकी शर्तें समझने और जरूरी कवरेज की लिखित पुष्टि मिलने तक पुरानी पॉलिसी को बंद नहीं करना चाहिए।

