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नौकरी के साथ मिला हेल्थ इंश्योरेंस कितना सुरक्षित? कॉरपोरेट और रिटेल पॉलिसी में समझें बड़ा अंतर

कंपनी से मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस कर्मचारियों के लिए बड़ी सुविधा होता है, लेकिन क्या यह लंबे समय की सुरक्षा देता है? बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Hercules Advisors के फाउंडर आदित्य शाह ने कॉरपोरेट और रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस के बीच अंतर समझाया और बताया कि अपनी पॉलिसी क्यों जरूरी है।

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Corporate Health Cover या अपनी पॉलिसी? समझें फर्क
नौकरी खत्म तो हेल्थ कवर भी खत्म? जानें बड़ा सच

In Short

  • कॉरपोरेट हेल्थ कवर नौकरी से जुड़ा होता है, नौकरी खत्म होने पर समाप्त हो सकता है।
  • रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस लंबे समय की व्यक्तिगत मेडिकल सुरक्षा देता है।
  • एक्सपर्ट ने कंपनी के कवर के साथ अपनी पॉलिसी रखने की सलाह दी।

आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस मेडिकल खर्चों से बचाव के लिए बेहद जरूरी हो गया है। लेकिन कई लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि कंपनी की ओर से मिलने वाला कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस और खुद खरीदी गई रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी एक जैसी नहीं होती। दोनों के फायदे और सीमाएं अलग-अलग होते हैं।

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बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Hercules Advisors के फाउंडर आदित्य शाह ने बताया कि कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस और रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि कॉरपोरेट कवर आपकी नौकरी से जुड़ा होता है, जबकि रिटेल पॉलिसी आपकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए होती है।

नौकरी खत्म होते ही खत्म हो सकता है कॉरपोरेट कवर

आदित्य शाह ने बताया कि कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी अपने कर्मचारियों को देती है और यह सुविधा तब तक रहती है, जब तक व्यक्ति उस संस्थान में काम करता है।

उन्होंने कहा कि जैसे ही नौकरी खत्म होती है या व्यक्ति कंपनी छोड़ता है, कॉरपोरेट हेल्थ कवर भी समाप्त हो सकता है। यानी लंबे समय की मेडिकल सुरक्षा के लिए केवल कंपनी के बीमा पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

रिटेल हेल्थ पॉलिसी देती है लंबे समय की सुरक्षा

वहीं, रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी व्यक्ति खुद खरीदता है। आदित्य शाह के मुताबिक, अगर व्यक्ति समय पर प्रीमियम भरता रहता है तो यह पॉलिसी लंबे समय तक जारी रह सकती है।

उन्होंने बताया कि रिटेल पॉलिसी में लाइफटाइम रिन्यूअल का विकल्प मिलता है और यह नौकरी से जुड़ी नहीं होती। इसलिए नौकरी बदलने या रोजगार खत्म होने की स्थिति में भी व्यक्ति के पास अपना हेल्थ कवर बना रहता है।

कॉरपोरेट पॉलिसी का फायदा भी बड़ा

आदित्य शाह ने यह भी बताया कि कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें कई बीमारियां पहले दिन से कवर हो सकती हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति नौकरी के दौरान कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से प्रभावित होता है, तो कंपनी की हेल्थ पॉलिसी में तय सम इंश्योर्ड तक इलाज का खर्च कवर हो सकता है।

लेकिन अगर किसी व्यक्ति को बीमारी का पता चलने के बाद नई रिटेल हेल्थ पॉलिसी खरीदनी हो, तो उसे कवर मिलने में मुश्किल आ सकती है।

क्यों जरूरी है अपनी हेल्थ पॉलिसी रखना?

आदित्य शाह ने कहा कि कंपनी की हेल्थ पॉलिसी एक अतिरिक्त सुरक्षा देती है, लेकिन इसके साथ अपनी रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रखना भी जरूरी है।

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उनके मुताबिक, कॉरपोरेट पॉलिसी नौकरी तक सीमित होती है, जबकि व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस व्यक्ति को लंबे समय तक मेडिकल खर्चों से बचाने में मदद कर सकता है।

इसलिए नौकरी करने वाले लोगों के लिए बेहतर रणनीति यह हो सकती है कि वे कंपनी से मिलने वाले हेल्थ कवर के साथ-साथ अपनी अलग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी भी रखें, ताकि भविष्य में किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।