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विदेशी निवेशक भारत से क्यों निकाल रहे पैसा? क्या टैक्स में राहत से बदलेगा बाजार का रुख, अंकित जैन ने बताया

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की भारी निकासी के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या टैक्स में राहत देने से विदेशी पैसा वापस आ सकता है? बिजनेस टुडे से बातचीत में वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने बताया कि वैश्विक बाजारों में निवेशक कैसे फैसले लेते हैं और क्यों सिर्फ 1.5% का अंतर भी भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

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टैक्स घटेगा तो लौटेंगे विदेशी निवेशक?
टैक्स घटेगा तो लौटेंगे विदेशी निवेशक?

In Short

  • विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच इक्विटी टैक्स में राहत और विदेशी निवेश की वापसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
  • वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन के मुताबिक, टैक्स विदेशी निवेशकों के फैसले को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारण है।
  • अंकित जैन ने कहा कि कई बार सिर्फ 150 बेसिस पॉइंट यानी 1.5% का अंतर भी दो देशों के बीच निवेश का फैसला बदल सकता है।

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बीच इक्विटी पर लगने वाले टैक्स को लेकर बहस तेज हो गई है। इस साल विदेशी निवेशकों की ओर से 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली का जिक्र करते हुए सवाल उठ रहा है कि क्या टैक्स में राहत मिलने से विदेशी निवेशक दोबारा भारतीय बाजार की ओर आकर्षित होंगे? हालांकि, निवेश के फैसले सिर्फ टैक्स पर निर्भर नहीं करते, लेकिन टैक्स की दरें निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न पर असर जरूर डालती हैं।

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बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने कहा कि विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स अकेला कारण नहीं है, लेकिन यह निवेश के रास्ते में एक बड़ी बाधा बन सकता है। उनके मुताबिक, आज निवेशक अलग-अलग देशों के बाजारों की तुलना करके तेजी से फैसले लेते हैं। ऐसे में भारत को विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए टैक्स जैसी लागतों पर ध्यान देना होगा।

विदेशी निवेशकों के फैसले पर कितना असर डालता है टैक्स?

अंकित जैन ने कहा कि आज वैश्विक निवेश का माहौल पहले से काफी बदल चुका है। अब किसी भी देश में होने वाली आर्थिक या बाजार से जुड़ी जानकारी कुछ ही सेकंड में दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंच जाती है।

इस वजह से विदेशी निवेशकों के लिए एक देश से पैसा निकालकर दूसरे देश में लगाना पहले के मुकाबले आसान हो गया है।

उन्होंने बताया कि निवेशक सिर्फ किसी देश की विकास संभावनाओं को नहीं देखते, बल्कि यह भी समझने की कोशिश करते हैं कि उन्हें निवेश के बाद वास्तविक रिटर्न कितना मिलेगा।

अगर किसी देश में निवेश की लागत ज्यादा है और दूसरे देश में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना दिखाई देती है, तो निवेशक अपना पैसा दूसरी जगह लगा सकते हैं।

अंकित जैन के मुताबिक, टैक्स निवेश से मिलने वाले रिटर्न को प्रभावित करता है। इसलिए विदेशी निवेशक किसी बाजार में पैसा लगाने या निकालने का फैसला करते समय टैक्स को भी ध्यान में रखते हैं।

सिर्फ 1.5% का अंतर भी बदल सकता है निवेश का फैसला

अंकित जैन ने बताया कि वैश्विक बाजार में निवेश आकर्षित करने के लिए देशों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। कई बार दो देशों में निवेश से मिलने वाले संभावित रिटर्न का अंतर बहुत कम होता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मामलों में यह अंतर केवल 150 बेसिस पॉइंट यानी 1.5% तक हो सकता है।

ऐसी स्थिति में टैक्स की वजह से होने वाला अतिरिक्त खर्च निवेशकों के फैसले को बदल सकता है। अगर टैक्स चुकाने के बाद किसी दूसरे देश में बेहतर रिटर्न मिलता है, तो निवेशक उस बाजार को प्राथमिकता दे सकते हैं।

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उनका कहना है कि भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए ऐसी बाधाओं को कम करने पर ध्यान देना चाहिए, जो निवेश से मिलने वाले रिटर्न को प्रभावित करती हैं।

हालांकि, उन्होंने यह दावा नहीं किया कि केवल टैक्स घटाने से विदेशी निवेशकों की वापसी सुनिश्चित हो जाएगी। उनका जोर इस बात पर था कि टैक्स निवेश की कुल लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में छोटे अंतर भी बड़े निवेश फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।