
म्यूचुअल फंड का Riskometer दिखा रहा Moderately High, High, Very High Risk? जानिए क्या है इसका असली मतलब
म्यूचुअल फंड के Riskometer पर ‘Very High Risk’ देखकर घबरा जाते हैं? यह लेबल फंड के जोखिम की पूरी कहानी नहीं बताता। एक ही रिस्क कैटेगरी वाले फंड्स की वोलैटिलिटी और गिरावट में बड़ा अंतर हो सकता है। ऐसे में निवेश से पहले किन आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है, जानिए।

In Short
- ‘Very High Risk’ लेबल वाले सभी म्यूचुअल फंड्स में जोखिम एक जैसा होना जरूरी नहीं है।
- Riskometer के साथ Historical Volatility और Maximum Drawdown देखना भी जरूरी है।
- एक ही Risk Label के बावजूद अलग-अलग फंड्स की वोलैटिलिटी और गिरावट में बड़ा अंतर हो सकता है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय आपने Riskometer जरूर देखा होगा। कई इक्विटी म्यूचुअल फंड में इसकी सुई लाल निशान पर होती है और साथ में ‘Very High Risk’ लिखा रहता है। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि ‘Very High Risk’ वाले सभी फंड में जोखिम एक जैसा है? जरूरी नहीं।
NYVO के फाउंडर हर्ष सोनी के मुताबिक, Riskometer नियमों पर आधारित एक पैमाना है। जनवरी 2021 से म्यूचुअल फंड्स को पोर्टफोलियो में मौजूद सिक्योरिटीज के आधार पर Riskometer की गणना करनी होती है। इसका आकलन हर महीने दोबारा किया जाता है।
क्यों कई Equity Funds पर दिखता है ‘Very High Risk’?
Riskometer में पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों के आकार, उनकी वोलैटिलिटी और लिक्विडिटी जैसे फैक्टर्स को देखा जाता है। हर्ष सोनी की ओर से बताई गई मेथडोलॉजी के मुताबिक, इनका स्कोर मिलाकर औसत 5 से ज्यादा होने पर फंड को ‘Very High Risk’ कैटेगरी में रखा जाता है।
यही वजह है कि अलग-अलग तरह के इक्विटी फंड एक ही रिस्क कैटेगरी में आ सकते हैं, जबकि उनका पिछला प्रदर्शन और उतार-चढ़ाव अलग हो सकता है।
एक ही Risk Label लेकिन आंकड़े अलग
हर्ष सोनी ने Parag Parikh Flexi Cap, UTI Nifty 50 Index और Nippon India Small Cap का उदाहरण दिया है। तीनों का Riskometer लेबल ‘Very High Risk’ था।
31 अगस्त 2026 तक पांच साल के आंकड़ों के मुताबिक, Parag Parikh Flexi Cap की सालाना वोलैटिलिटी 10.56% और Maximum Drawdown 14.01% था। UTI Nifty 50 Index में ये आंकड़े क्रमशः 13.11% और 14.73% थे।

वहीं, Nippon India Small Cap की पांच साल की सालाना वोलैटिलिटी 17.53% और Maximum Drawdown 23.18% था। यानी एक ही Riskometer लेबल के बावजूद इन फंड्स में ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव और सबसे बड़ी गिरावट अलग-अलग रही।
Riskometer क्या नहीं बताता?
सोनी के मुताबिक, Riskometer सीधे तौर पर यह नहीं बताता कि कोई फंड इतिहास में कितना गिर चुका है। इसमें पोर्टफोलियो कंसंट्रेशन या फंड की अलग-अलग होल्डिंग्स के बीच कोरिलेशन भी सीधे शामिल नहीं होता।
इसके अलावा यह भी नहीं देखा जाता कि निवेशक को अपने पैसे की जरूरत कब पड़ेगी। लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए निवेश करने वाले व्यक्ति और जल्द पैसा निकालने वाले निवेशक के लिए अस्थायी गिरावट का असर अलग हो सकता है।
सिर्फ Riskometer देखना काफी नहीं
सोनी का सुझाव है कि निवेशक Riskometer को रिस्क समझने की शुरुआत मानें, पूरी तस्वीर नहीं। इसके साथ फंड की Historical Volatility और Maximum Drawdown भी देखी जा सकती है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में फंड ने पहले कैसा व्यवहार किया है।

