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कम NAV वाला फंड बेहतर और ज्यादा एनएवी वाला म्यूचुअल फंड खराब? एक्सपर्ट ने तोड़ी निवेशकों की बड़ी गलतफहमी

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सिर्फ NAV देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। आनंद राठी वेल्थ की श्वेता राजानी के मुताबिक, ज्यादा NAV का मतलब महंगा फंड नहीं होता। निवेशकों को फंड की परफॉर्मेंस, निवेश रणनीति और फंड मैनेजर की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए, न कि सिर्फ NAV पर।

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AI Generated Image

In Short

  • एक्सपर्ट के मुताबिक सिर्फ कम NAV देखकर किसी म्यूचुअल फंड को बेहतर नहीं माना जा सकता।
  • किसी फंड का NAV 2000 रुपये होने का मतलब यह नहीं कि उसमें आगे रिटर्न की गुंजाइश खत्म हो गई है।

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कई लोगों की यह सोच होती है कि कम NAV (नेट एसेट वैल्यू) वाला फंड सस्ता होता है और उसमें ज्यादा कमाई की संभावना होती है। वहीं, ज्यादा NAV वाले फंड को अक्सर महंगा समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

बिजनेस टुडे के शो Market Commentary में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवाल का जवाब देते हुए आनंद राठी वेल्थ में म्यूचुअल फंड्स की हेड श्वेता राजानी ने कहा कि यह निवेशकों की सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक है।

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NAV की तुलना शेयर से ना करें: श्वेता राजानी

श्वेता राजानी के मुताबिक, किसी म्यूचुअल फंड का NAV ज्यादा होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह महंगा है या उसमें आगे बढ़ने की गुंजाइश खत्म हो गई है। निवेशकों को NAV के बजाय फंड के प्रदर्शन और फंड मैनेजर की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।

श्वेता राजानी का कहना है कि कई निवेशक म्यूचुअल फंड के NAV की तुलना शेयर की कीमत से करने लगते हैं, जबकि दोनों पूरी तरह अलग चीजें हैं।

उन्होंने बताया कि किसी शेयर की कीमत एक कंपनी की वैल्यू को दिखाती है, जबकि म्यूचुअल फंड का NAV उसके पोर्टफोलियो में शामिल कई शेयरों और दूसरी परिसंपत्तियों के टोटल वैल्यू को दिखाती है। यानी सिर्फ NAV ज्यादा होने से यह नहीं कहा जा सकता कि फंड महंगा है।

NAV बढ़ने का मतलब मौका खत्म होना नहीं

राजानी ने समझाया कि अगर किसी फंड का NAV 10 रुपये से बढ़कर 20 रुपये हो गया है, तो इसका मतलब है कि उसके पोर्टफोलियो में शामिल निवेशों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि अब उसमें आगे बढ़ने की गुंजाइश नहीं बची।

फंड मैनेजर समय-समय पर पोर्टफोलियो में बदलाव करते रहते हैं। वे मुनाफावसूली करते हैं, नए शेयर जोड़ते हैं और निवेश रणनीति में बदलाव करते हैं। इसलिए फंड का पोर्टफोलियो लगातार बदलता रहता है।

इसी वजह से किसी फंड का NAV 20 रुपये से बढ़कर 2000 रुपये तक भी पहुंच सकता है। 2000 रुपये का NAV भी यह संकेत नहीं देता कि फंड अब और नहीं बढ़ सकता।

निवेश करते समय किस बात पर दें ध्यान?

एक्सपर्ट का मानना है कि निवेशकों को यह देखना चाहिए कि फंड ने अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन किया है। साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि फंड मैनेजर की निवेश रणनीति कितनी मजबूत है।

अगर कोई फंड लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और उसका निवेश रिकॉर्ड मजबूत है, तो सिर्फ NAV देखकर निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए।

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Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।