Index Funds Vs ETFs: निवेशकों की बढ़ रही पैसिव इन्वेस्टिंग की रुचि, जानें कहां इन्वेस्ट करना सही?
Index Funds Vs ETFs: भारत में कई निवेशक अस्थिर इक्विटी बाजार और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के चलते पैसिव इन्वेस्टिंग की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कारण वे Index Funds और Exchange-Traded Funds (ETFs) जैसे निवेश ऑप्शन को एक्सप्लोर कर रहे हैं।

भारत में कई निवेशक अस्थिर इक्विटी बाजार और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के चलते पैसिव इन्वेस्टिंग की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कारण वे Index Funds और Exchange-Traded Funds (ETFs) जैसे निवेश ऑप्शन को एक्सप्लोर कर रहे हैं। हालांकि, दोनों का उद्देश्य लगभग समान होता है, लेकिन वे प्राइसिंग और ट्रेडिंग मेथड जैसी बातों में एक-दूसरे से काफी अलग हैं।
ट्रेडिंग मेकानिज्म
ETFs की ट्रेडिंग शेयर बाजार में स्टॉक्स की तरह होती है और इन्हें पूरे दिन मौजूदा बाजार मूल्य पर खरीदा या बेचा जा सकता है। दूसरी ओर, Index Funds केवल शेयर बाजार बंद होने के बाद ट्रेड किए जाते हैं।
इसके अलावा, ETFs में निवेश के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी होता है, क्योंकि ये स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं। वहीं, Index Funds में निवेश करने के लिए डीमैट अकाउंट की आवश्यकता नहीं होती, जिससे वे उन निवेशकों के लिए सुविधाजनक होते हैं, जो बाजार से जुड़े जटिलताओं के बिना म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं।
SIPs (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान)
Index Funds में निवेशक SIPs के जरिए निवेश कर सकते हैं, जिसमें वे एक तयशुदा रकम नियमित अंतराल पर निवेश कर सकते हैं। लेकिन, ETFs में आमतौर पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती।
निवेश की लचीलापन (Investment Flexibility)
ETFs में निवेशक पूरे दिन ट्रेडिंग कर सकते हैं, क्योंकि ये रियल-टाइम ट्रेडिंग की सुविधा देते हैं। वहीं, Index Funds में यह लचीलापन नहीं होता, क्योंकि इन्हें केवल ट्रेडिंग डे के अंत में खरीदा या बेचा जा सकता है।
खर्च (Expense Ratio)
आमतौर पर, ETFs की लागत Index Funds से कम होती है, क्योंकि ये पैसिव इन्वेस्टमेंट रणनीति अपनाते हैं और इनका ऑपरेशनल खर्च भी कम होता है। यही वजह है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ETFs अधिक आकर्षक विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि वे कम लागत में बाजार में भागीदारी का अवसर प्रदान करते हैं।

