ईपीएफ का पैसा एनपीएस में करना है ट्रांसफर? नहीं लगेगा टैक्स, लेकिन कंपनी से जुड़ी ये शर्त जानना है जरूरी
ईपीएफ में जमा रिटायरमेंट का पैसा एनपीएस में ट्रांसफर किया जा सकता है और तय शर्तों के तहत इस ट्रांसफर पर टैक्स भी नहीं लगता। हालांकि, यह सुविधा हर नौकरीपेशा कर्मचारी के लिए उपलब्ध नहीं है। इसके लिए कंपनी में कॉरपोरेट एनपीएस स्कीम होना जरूरी है। इसलिए पैसा शिफ्ट करने से पहले एचआर से नियम और प्रक्रिया जरूर समझ लें।

In Short
- ईपीएफ से एनपीएस में तय नियमों के तहत पैसा ट्रांसफर करने पर ट्रांसफर के समय टैक्स नहीं लगता
- कर्मचारी की कंपनी में कॉरपोरेट एनपीएस स्कीम होना सबसे जरूरी शर्त है
- ट्रांसफर से पहले एचआर से योग्यता, जरूरी डॉक्यूमेंट्स और पूरी प्रक्रिया की जानकारी लेना जरूरी है
नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF से NPS दोनों ही रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ने के अहम तरीके हैं। कई कर्मचारी समय के साथ अपने अलग-अलग रिटायरमेंट फंड को एक जगह लाना चाहते हैं या ईपीएफ में जमा रकम का कुछ हिस्सा एनपीएस में शिफ्ट करने पर विचार करते हैं।
अच्छी बात यह है कि तय नियमों के तहत ईपीएफ का जमा पैसा एनपीएस में ट्रांसफर करने पर ट्रांसफर के समय टैक्स नहीं देना पड़ सकता। हालांकि, यह सुविधा हर कर्मचारी को अपने आप नहीं मिलती। इसे इस्तेमाल करने से पहले सबसे जरूरी है यह देखना कि आपकी कंपनी में कॉरपोरेट एनपीएस की सुविधा मौजूद है या नहीं।
कॉरपोरेट एनपीएस होना सबसे जरूरी शर्त
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनकम टैक्स एक्ट में किए गए बदलाव तय शर्तों के तहत कर्मचारी को ईपीएफ से एनपीएस में पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा देते हैं। इस ट्रांसफर को अपने आप टैक्सेबल ट्रांजैक्शन नहीं माना जाता। लेकिन इसके लिए कर्मचारी की कंपनी में कॉरपोरेट एनपीएस स्कीम लागू होना जरूरी है।
कॉरपोरेट एनपीएस में कर्मचारी के साथ एम्प्लॉयर की भी भूमिका होती है और इसमें एम्प्लॉयर का कंट्रीब्यूशन भी शामिल हो सकता है। अगर कंपनी ने कॉरपोरेट एनपीएस शुरू नहीं किया है तो कर्मचारी आमतौर पर इस रास्ते से अपना पहले से जमा ईपीएफ बैलेंस एनपीएस में ट्रांसफर नहीं कर पाएगा। ऐसी स्थिति में एम्प्लॉयर मौजूदा रिटायरमेंट कंट्रीब्यूशन स्ट्रक्चर के तहत ही योगदान जारी रखेगा।
ईपीएफ से एनपीएस में ट्रांसफर कैसे शुरू करें?
अगर कोई कर्मचारी अपना जमा ईपीएफ बैलेंस एनपीएस में ट्रांसफर करना चाहता है तो सबसे पहले उसे अपनी कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट से संपर्क करना चाहिए। एचआर से यह पता करना जरूरी है कि ऑर्गेनाइजेशन में कॉरपोरेट एनपीएस की सुविधा उपलब्ध है या नहीं।
सुविधा मौजूद होने पर एचआर डिपार्टमेंट कर्मचारी को आगे की प्रोसेस समझा सकता है और ट्रांसफर शुरू करने में मदद कर सकता है। कर्मचारी को यह भी पता कर लेना चाहिए कि उसकी कंपनी में ट्रांसफर के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए और क्या जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस प्रोसेस के जरिए योग्य कर्मचारी अपने ईपीएफ अकाउंट में पहले से जमा रकम को तय नियमों के तहत एनपीएस अकाउंट में ले जा सकते हैं।
क्या ईपीएफ से एनपीएस ट्रांसफर पर टैक्स लगेगा?
एक्सपर्ट के मुताबिक, तय नियमों के तहत योग्य ईपीएफ कॉर्पस को एनपीएस में ट्रांसफर करने पर सिर्फ ट्रांसफर की वजह से कर्मचारी पर इनकम टैक्स नहीं लगता। यानी ईपीएफ की योग्य रकम एनपीएस में शिफ्ट करने को अपने आप टैक्सेबल ट्रांसफर नहीं माना जाता।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ईपीएफ और एनपीएस से जुड़े हर ट्रांजैक्शन का टैक्स ट्रीटमेंट एक जैसा होगा। कंट्रीब्यूशन, विड्रॉल और बाद में एनपीएस से मिलने वाली रकम पर लागू टैक्स नियम अलग हो सकते हैं और वे उस समय लागू नियमों और परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।
पैसा शिफ्ट करने से पहले इन बातों की तुलना करें
ईपीएफ का पैसा एनपीएस में ले जाने का फैसला केवल टैक्स बेनिफिट देखकर नहीं करना चाहिए। कर्मचारी को दोनों विकल्पों के इन्वेस्टमेंट चॉइस, विड्रॉल रूल्स, टैक्स ट्रीटमेंट और रिस्क प्रोफाइल की भी तुलना करनी चाहिए। ईपीएफ और एनपीएस का इन्वेस्टमेंट स्ट्रक्चर अलग है, इसलिए रिटायरमेंट कॉर्पस को शिफ्ट करने से पहले अपनी जरूरत और फाइनेंशियल प्लानिंग को समझना जरूरी है।
सबसे पहले ये तीन चीजें चेक करें
कर्मचारी को पहले यह देखना चाहिए कि एम्प्लॉयर कॉरपोरेट एनपीएस ऑफर करता है या नहीं, उसका जमा ईपीएफ बैलेंस लागू नियमों के तहत ट्रांसफर के लिए योग्य है या नहीं और कंपनी ट्रांसफर के लिए कौन-सी प्रोसेस और डॉक्यूमेंट्स मांगती है। सबसे अहम बात यही है कि ईपीएफ से एनपीएस में ट्रांसफर हर नौकरीपेशा कर्मचारी के लिए अपने आप मिलने वाली सुविधा नहीं है। इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले एचआर डिपार्टमेंट से कॉरपोरेट एनपीएस और पूरी ट्रांसफर प्रोसेस की जानकारी लेना जरूरी है।

