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भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत, 2030 तक प्रमुख युद्धपोतों पर ब्रह्मोस लगाने की तैयारी

भारतीय नौसेना अपनी समुद्री ताकत को और मजबूत करने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती तेजी से बढ़ा रही है। लक्ष्य है कि 2030 तक ज्यादातर प्रमुख युद्धपोत इस सुपरसोनिक मिसाइल से लैस हों। नए जहाजों में सिस्टम पहले से जुड़ा है और पुराने जहाजों को भी अपग्रेड किया जा रहा है।

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In Short

  • भारतीय नौसेना 2030 तक ज्यादातर प्रमुख युद्धपोतों पर ब्रह्मोस मिसाइल तैनात करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
  • पिछले एक साल में छह से ज्यादा ब्रह्मोस सक्षम युद्धपोत जुड़े हैं और इनकी संख्या करीब 20 पहुंच गई है।
  • 220 से ज्यादा ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज मिसाइलों की खरीद को मंजूरी मिल चुकी है और पुराने जहाजों को भी अपग्रेड किया जा रहा है।

BrahMos Missile: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस भारतीय सशस्त्र बलों के प्रमुख स्ट्राइक सिस्टम में शामिल रहा। इस दौरान इसकी सटीकता और प्रभावी क्षमता सामने आने के बाद नौसेना ने इसे बड़े स्तर पर अपनाने पर जोर दिया है।

ब्रह्मोस की सुपरसोनिक स्पीड और लंबी दूरी की मारक क्षमता दुश्मन के जहाजों और तटीय लक्ष्यों पर तेजी से हमला करने में मदद करती है।

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नए युद्धपोतों में पहले से ब्रह्मोस की व्यवस्था

भारतीय नौसेना के नई पीढ़ी के युद्धपोतों को ब्रह्मोस क्षमता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है। नीलगिरी क्लास स्टील्थ फ्रिगेट्स जैसे आईएनएस उदयगिरी आईएनएस हिमगिरी और आईएनएस महेंद्रगिरि में आठ वर्टिकल लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइलों की व्यवस्था है।

कुछ नए विध्वंसक जहाज 16 वर्टिकल लॉन्चर तक ले जा सकते हैं, जबकि पुराने मॉडल में आठ लॉन्चर की व्यवस्था है।

220 से ज्यादा मिसाइलों की खरीद को मंजूरी

फरवरी 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने नौसेना के युद्धपोतों के लिए 220 से ज्यादा ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी थी।

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इसके बाद 2025 में अतिरिक्त फायर कंट्रोल सिस्टम और वर्टिकल लॉन्चर को मंजूरी मिली। इसका मकसद नौसेना के ज्यादा जहाजों तक ब्रह्मोस की पहुंच बढ़ाना है।

पुराने सिस्टम को ब्रह्मोस से बदलने की तैयारी

नौसेना का लंबी अवधि का लक्ष्य पुराने युद्धपोतों पर मौजूद एंटी सरफेस मिसाइल सिस्टम को ब्रह्मोस से बदलना है। अगले चार वर्षों में ज्यादातर युद्धपोतों पर इसके इंटीग्रेशन का काम आगे बढ़ाया जाएगा।

नौसेना नए युद्धपोत भी जोड़ रही है और पुराने प्लेटफॉर्म को रेट्रोफिट भी कर रही है।

2047 तक पूरी तरह स्वदेशी बनने का लक्ष्य

भारतीय नौसेना ने 2047 तक शत प्रतिशत स्वदेशी बनने का लक्ष्य रखा है। ब्रह्मोस भारत और रूस के संयुक्त उद्यम का उत्पाद है, लेकिन इसमें स्वदेशी सामग्री और तकनीक का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है।

ब्रह्मोस भारतीय नौसेना के अलावा थलसेना और वायु सेना के प्लेटफॉर्म पर भी तैनात है। इसके एक्सटेंडेड रेंज और भविष्य के हाइपरसोनिक वर्जन पर भी काम जारी है।