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क्या आप भी Mutual Fund में AUM देखकर लगाते हैं पैसा? निवेश से पहले जान लें ये जरूरी बात

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय AUM का आंकड़ा अक्सर सामने आता है। कई निवेशक ज्यादा AUM को बेहतर फंड से जोड़कर देखते हैं, लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? पैसा लगाने से पहले समझिए AUM का मतलब, इसमें बदलाव की वजह और फंड चुनते समय इसकी कितनी अहमियत होती है।

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In Short

  • AUM से म्यूचुअल फंड स्कीम के कुल एसेट्स की मार्केट वैल्यू का पता चलता है।
  • बाजार में बदलाव, नए निवेश और रिडेम्प्शन के कारण AUM लगातार बदल सकता है।
  • ज्यादा AUM बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं, फंड चुनते समय दूसरे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय निवेशकों के सामने NAV, एक्सपेंस रेशियो और AUM जैसे कई शब्द आते हैं। फंड फैक्टशीट से लेकर निवेश प्लेटफॉर्म तक AUM का आंकड़ा प्रमुखता से दिखाया जाता है। लेकिन केवल बड़ा AUM देखकर किसी म्यूचुअल फंड को बेहतर मान लेना सही नहीं है। ऐसे में समझना जरूरी है कि आखिर AUM क्या है और इसमें बदलाव कैसे होता है।

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क्या होता है AUM?

AUM का पूरा नाम Assets Under Management है। आसान भाषा में कहें तो किसी म्यूचुअल फंड स्कीम के पास मैनेजमेंट के तहत मौजूद सभी एसेट्स की कुल मार्केट वैल्यू को AUM कहा जाता है।

इन एसेट्स में इक्विटी, डेट इंस्ट्रूमेंट्स, मनी मार्केट सिक्योरिटीज और गोल्ड से जुड़े निवेश समेत दूसरी सिक्योरिटीज शामिल हो सकती हैं। यह स्कीम के निवेश उद्देश्य पर निर्भर करता है।

क्यों बदलता रहता है AUM?

AUM कोई तय आंकड़ा नहीं है। बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की गतिविधियों के कारण इसमें लगातार बदलाव होता रहता है। अगर निवेशक किसी स्कीम में नया पैसा लगाते हैं तो उसका AUM बढ़ सकता है। वहीं, निवेशक यूनिट्स रिडीम करते हैं तो फंड से पैसा बाहर जाता है और AUM कम हो सकता है।

इसके अलावा फंड के पोर्टफोलियो में मौजूद सिक्योरिटीज की कीमत बढ़ने पर AUM बढ़ सकता है, जबकि बाजार में गिरावट आने पर इसमें कमी आ सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

₹500 करोड़ से ₹540 करोड़ कैसे हुआ AUM?

इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए किसी म्यूचुअल फंड स्कीम का AUM ₹500 करोड़ है। उसके निवेश की वैल्यू ₹30 करोड़ बढ़ जाती है। नए निवेशकों से ₹20 करोड़ आते हैं, जबकि मौजूदा निवेशक ₹10 करोड़ की यूनिट्स रिडीम कर लेते हैं।

ऐसे में नया AUM ₹500 करोड़ + ₹30 करोड़ + ₹20 करोड़ - ₹10 करोड़ यानी ₹540 करोड़ हो जाएगा।

निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है AUM?

AUM से किसी म्यूचुअल फंड स्कीम के आकार का अंदाजा मिलता है। इससे यह भी समझने में मदद मिलती है कि स्कीम कितने बड़े स्तर पर निवेश मैनेज कर रही है। बढ़ता AUM निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का संकेत हो सकता है, जबकि गिरावट के पीछे रिडेम्प्शन या बाजार में गिरावट जैसे कारण हो सकते हैं।

क्या ज्यादा AUM मतलब बेहतर फंड?

ज्यादा AUM होने का मतलब यह नहीं है कि वह म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देगा। बड़े AUM वाले फंड में निवेशकों की भागीदारी ज्यादा हो सकती है, लेकिन यह बेहतर प्रदर्शन की गारंटी नहीं है। इसी तरह कम AUM वाला फंड भी अपनी निवेश रणनीति और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के आधार पर अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।

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इसलिए म्यूचुअल फंड चुनते समय सिर्फ AUM नहीं, बल्कि निवेश उद्देश्य, रिस्क प्रोफाइल, एसेट एलोकेशन, पिछला प्रदर्शन, फंड मैनेजमेंट, एक्सपेंस रेशियो और निवेश की अवधि जैसे दूसरे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।