
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का नया अध्याय, क्या हो रहे हैं प्रयास?
SBI अध्ययन ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नई गरीबी रेखा 1,622 रुपये निर्धारित की है। भारत में विशेष रूप से ग्रामीण भारत में लोग पैसे खर्च करने के तौर-तरीकों में बदलाव ला रहे हैं और जो चाहते हैं उसके लिए बड़े सपने देख रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में न सिर्फ सरकार बल्कि समाज के कई वर्ग अपना-अपना योगदान दे रहे हैं। ग्रामीण आर्थिक शास्त्र में जितना जरूरी आय बढ़ाना है उतना ही जरूरी मेडिकल खर्चों को कम करना भी है।

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के एक हालिया रिपोर्ट में ये पाया गया है कि 2022-23 में भारत की गरीबी दर लगभग 4.5% से 5% थी। लेटेस्ट हाउसहोल्ड कंजप्शन सर्वे का इस्तेमाल करते हुए ये आंकड़े सामने आए हैं कि 2011-12 के बाद से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गरीबी में कमी आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 2011-12 में 25.7% से गिरकर 2022-23 में 7.2% हो गई। इसमें 2018-19 के बाद से ग्रामीण गरीबी में बड़ी गिरावट है।

SBI अध्ययन ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नई गरीबी रेखा 1,622 रुपये निर्धारित की है। भारत में विशेष रूप से ग्रामीण भारत में लोग पैसे खर्च करने के तौर-तरीकों में बदलाव ला रहे हैं और जो चाहते हैं उसके लिए बड़े सपने देख रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में न सिर्फ सरकार बल्कि समाज के कई वर्ग अपना-अपना योगदान दे रहे हैं। ग्रामीण आर्थिक शास्त्र में जितना जरूरी आय बढ़ाना है उतना ही जरूरी मेडिकल खर्चों को कम करना भी है।

ऐसे में राजस्थान के रिमोट गांवों में आरडी फाउंडेशन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है। 36 गांवों में 1 लाख से ज्यादा OPD संचालित करके फाउंडेशन तत्काल स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने में जुटा है। फाउंडेशन की मोबाइल मेडिकल हेल्थ वेन, मेडिकल प्रोफेशनल्स एक्सपर्ट्स, मुफ्त स्वास्थ्य जांच से गांव वाले स्वास्थ्य से जुड़ी लागत को कम करने में सशक्त बन रहे हैं। आरडी फाउंडेशन ने मैकेयर अकादमी की भी स्थापना की है जो व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान मुफ्त मोबाइल मरम्मत प्रशिक्षण भी दे रहा है।
आरडी फाउंडेशन के संस्थापक चेतन सिंह राठौड़ का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य देखभाल पहल से होने वाले बदलाव हमारे जमीनी स्तर के प्रयासों को शक्ति दे रहा है और ये इसका प्रमाण है। हम देश की समृद्धि के लिए आधारशिला के रूप में गांवों को सशक्त बनाने में विश्वास रखते हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन महत्त्वपूर्ण है क्योंकि देश की आबादी और श्रम शक्ति का करीब 70 प्रतिशत गांवों में ही रहता है। इनकी क्रय शक्ति में इजाफा पूरी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की मांग सुधारने के लिहाज से अहम है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार के लिए मोदी सरकार लगातार उपाय अपना रही है। जिससे किसानों की आय में सुधार, आपूर्ति शृंखला बेहतर, असंगठित और प्रवासी श्रमिकों को राहत मिले, एमएसएमई में सुधार और और ग्रामीण-शहरी संपर्क हो रहा है। इससे सारी अर्थव्यवस्था में मांग बेहतर होगी क्योंकि आबादी के बड़े हिस्से की क्रय शक्ति सुधरेगी और खपत भी बेहतर होगी।
