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दीवाली के अवसर पर नकली घी के काले कारोबार का पर्दाफाश: ब्रांडेड घी 240 रुपये किलो में कैसे बिक रहा है?

दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में मिठाई, नमकीन और गुजिया जैसे पकवान बनाए जा रहे हैं, और इनका स्वाद बढ़ाने के लिए लोग घी का इस्तेमाल करते हैं। इसी के चलते घी की भारी बिक्री हो रही है। लेकिन बाज़ार में नकली घी का चलन बढ़ने से स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आज तक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने एक स्टिंग ऑपरेशन में इस काले कारोबार की तह तक पहुंचने की कोशिश की, जिसमें बड़े खुलासे हुए हैं।

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दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों में मिठाई, नमकीन और गुजिया जैसे पकवान बनाए जा रहे हैं, और इनका स्वाद बढ़ाने के लिए लोग घी का इस्तेमाल करते हैं। इसी के चलते घी की भारी बिक्री हो रही है। लेकिन बाज़ार में नकली घी का चलन बढ़ने से स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आज तक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने एक स्टिंग ऑपरेशन में इस काले कारोबार की तह तक पहुंचने की कोशिश की, जिसमें बड़े खुलासे हुए हैं।

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घी के नाम पर मिलावटी

घी के नाम पर मिलावटी माल की बिक्री उत्तर प्रदेश के हाथरस में बड़े घी निर्माताओं तक पहुंचने के लिए, टीम ने दुकानदार बनकर स्थानीय उत्पादकों से संपर्क किया। घी निर्माता विष्णु वार्ष्णेय से बातचीत में सामने आया कि वह कई प्रमुख ब्रांड्स के नकली कार्टन में घी की पैकेजिंग कर बेच सकता है। विष्णु ने बताया कि 1 किलो के डिब्बे की कीमत मात्र 240 रुपये होगी, जबकि असली ब्रांडेड घी 600 रुपये किलो या उससे अधिक में बिकता है।

जब टीम ने विष्णु से पूछा कि घी कैसे बनाया गया है, तो उसने साफ-साफ बताने से इनकार कर दिया। टीम को जल्द ही पता चला कि यह घी असल में हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल और रिफाइंड तेल का मिश्रण था, जिसमें देसी घी का एसेंस मिलाया गया था। इसी तरह नकली घी का कारोबार हाथरस के अन्य उत्पादकों में भी फैल चुका है, जो इसे नामी ब्रांड्स के डिब्बों में बेचते हैं।

नकली उत्पाद स्टिंग ऑपरेशन

पूजा के घी के नाम पर भी नकली उत्पाद स्टिंग ऑपरेशन के दौरान टीम ने पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाले घी के निर्माता मेहुल खंडेलवाल से भी बात की। खंडेलवाल ने साफ किया कि उनके पास घी के कई तरह के 'ब्रांड' हैं, लेकिन उनमें से कोई भी असली घी नहीं है। खंडेलवाल ने बताया कि उनके प्रोडक्ट में डालडा और रिफाइंड तेल होता है, और घी शब्द का इस्तेमाल वे कहीं भी नहीं करते।

पूजा सामग्री के नाम पर बेचे जा रहे इन उत्पादों में असली घी का कोई अंश नहीं है। खंडेलवाल ने टीम को बताया कि उनके प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से की जाती है ताकि ग्राहक इसे घी समझ कर खरीदें, हालांकि असल में ये केवल हवन सामग्री हैं।

ये खुलासा न सिर्फ लोगों की सेहत से हो रहे खिलवाड़ को उजागर करता है, बल्कि नकली घी के बड़े और मुनाफे वाले कारोबार पर भी रोशनी डालता है।