IPO पर OYO का बड़ा फैसला अब दोबारा होगी वैल्युएशन
IPO का साइज कम करने के पीछे ओयो के फाउंडर रितेश अग्रवाल चाहते हैं कि वो खुद पर पड़ने वाले वित्तीय दबाव को कम करें, इसलिए वो कमजोर शर्तों के साथ ही ओयो के IPO को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

IPO पर OYO का बड़ा फैसलाअब दोबारा होगी वैल्युएशन
देश भर में ट्रेवल और होटल बुकिंग सर्विस देने वाली टेक कंपनी OYO ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी, अपने इनिशियल पब्लिक ऑफर यानि IPO के साइज को कम करने जा रही है। अब ऐसे में दो सबसे महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं, पहला - IPO का साइज कितना कम होगा? और दूसरा - IPO का साइज कम क्यों किया?
खबरों के मुताबिक इस IPO में करीब दो-तिहाई शेयरों में कटौती की जा रही है। साथ ही कंपनी फ्रेश शेयर्स को सिर्फ एक तिहाई को ही बेचेगी। इससे कंपनी को मिलने वाली फ्रेश कैपिटल की मात्रा कम हो जाएगी। ऐसे खबरें हैं कि कंपनी इस हफ्ते तक अपने IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल कर देगी।
अब ऐसे में दूसरा सवाल उठता है कि आखिर OYO ने IPO का साइज क्यों किया कम?
IPO का साइज कम करने के पीछे ओयो के फाउंडर रितेश अग्रवाल चाहते हैं कि वो खुद पर पड़ने वाले वित्तीय दबाव को कम करें, इसलिए वो कमजोर शर्तों के साथ ही ओयो के IPO को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि मौजूदा वक्त में कंपनी घाटे में चल रही है, इसके तिमाही नतीजे कमजोर रहे हैं। दिसंबर में कंपनी ने कहा कि वो अपने कॉरपोरेट और टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में 600 कर्मचारियों की छंटनी करेगी। साथ रितेश अग्रवाल ने फर्म में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का कर्ज लिया है।
जापान के सॉफ्टबैंक के निवेश वाली कंपनी ओयो अब दूसरी बार आईपीओ के लिए अप्लाई कर रही हैं। इससे पहले कंपनी ने साल 2021 के सितंबर महीने में पहली बार SEBI के पास IPO के लिए अपने दस्तावेज जमा कराए थे। उस समय डॉक्यूमेंट्स की कमी के चलते कंपनी को IPO पर मंजूरी नहीं मिल सकी थी। इसके बाद अब कई टेक कंपनियों की मार्केट वैल्यू में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में बढ़ती महंगाई और मंदी के चलते कई टेक कंपनियों की पिछले कुछ महीनों में चिंता बढ़ी है। ऐसे में OYO भी IPO के जरिए अपने कर्ज को जल्द से जल्द कम करना चाहता है।
