क्या होती है बॉन्ड यील्ड? कैसे घटती-बढ़ती है बॉन्ड यील्ड?
बॉन्ड यील्ड का मतलब होता है बॉन्ड से मिलने वाली आय। इस आय का उपयोग बॉन्ड के मूल्यांकन के लिए किया जाता है। बॉन्ड यील्ड इस बात को निर्धारित करता है कि बॉन्ड के धारक को कितनी आय मिलेगी।

क्या होती है बॉन्ड यील्ड? कैसे घटती-बढ़ती है बॉन्ड यील्ड?
अक्सर ये सवाल पूछा जाता है कि बॉन्ड यील्ड क्या है और जब ये बढ़ती है तो क्या होता है? बॉन्ड यील्ड का मतलब होता है बॉन्ड से मिलने वाली आय। इस आय का उपयोग बॉन्ड के मूल्यांकन के लिए किया जाता है। बॉन्ड यील्ड इस बात को निर्धारित करता है कि बॉन्ड के धारक को कितनी आय मिलेगी।
लेकिन बॉन्ड से मिलने वाली ये आय कई प्रकार की होती है। जैसे न्यूनतम बॉन्ड यील्ड, माध्यमिक बॉन्ड यील्ड और अधिकतम बॉन्ड यील्ड। यह बॉन्ड के मूल्य पर निर्भर करता है, जो बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
बॉन्ड यील्ड की गणना बॉन्ड के मूल्य और ब्याज दर से की जाती है। यदि बॉन्ड की मूल्य बढ़ेगा तो उसका यील्ड घटेगा और यदि बॉन्ड की मूल्य घटेगा तो उसका यील्ड बढ़ेगा। बॉन्ड यील्ड निर्धारण बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करता है।
अक्सर बॉन्ड यील्ड का शेयर बाजार के उतार-चढाव से भी असर होता है।
जब दुनियाभर में इकोनॉमी सुधरती है तो बॉन्ड यील्ड बढ़ती है। इसलिए, बाज़ार में पॉजिटिवटी होती है तो भी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है। दूसरी ओर, जब बाज़ार में आर्थिक मंदी या आर्थिक संकट होता है, तो बॉन्ड यील्ड घटती है। इस तरह, बाज़ार में नकारात्मक संकेतों से बॉन्ड यील्ड घटती है।भारत में बॉन्ड मार्केट का कारोबार बहुत बड़ा है। भारत के बॉन्ड मार्केट में दो तरह के बॉन्ड होते हैं: सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट बॉन्ड। सरकारी बॉन्ड भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं और कॉर्पोरेट बॉन्ड कंपनियों द्वारा जारी किए जाते हैं।
भारत के बॉन्ड मार्केट में लगभग 50 ट्रिलियन रुपये का बाजार है, जिसमें सरकारी बॉन्ड भी शामिल होते हैं। भारत के बॉन्ड मार्केट में निवेशकों के लिए विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं। जिसमें सरकारी बॉन्ड, कॉर्पोरेट बॉन्ड, टैक्स फ्री बॉन्ड और मुनीसिपल बॉन्ड शामिल होते हैं।

