
UPI पर MDR लगने से क्या Digital Rupee को मिलेगा बूस्ट? जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय
UPI पर ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR लगाए जाने की घोषणा के बाद डिजिटल रुपये को लेकर चर्चा तेज हो गई है। क्या इससे CBDC का इस्तेमाल बढ़ेगा या UPI का दबदबा बरकरार रहेगा? S&P Global की गीता चुघ ने डिजिटल रुपये की असली ताकत और भविष्य को लेकर अहम बातें बताई हैं।

In Short
- ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR लगाए जाने की घोषणा
- S&P Global के मुताबिक UPI आगे भी प्रमुख पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहेगा
- S&P Global के मुताबिक UPI आगे भी प्रमुख पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहेगा
भारत में डिजिटल पेमेंट की दुनिया में UPI का दबदबा लगातार बना हुआ है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की डिजिटल करेंसी CBDC या डिजिटल रुपया अभी भी अपनाए जाने के मामले में काफी पीछे है। अब 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाए जाने की घोषणा हुई है। ऐसे में सवाल है कि क्या इससे डिजिटल रुपये को तेजी मिल सकती है?
डिजिटल रुपये का सर्कुलेशन घटा
RBI ने साल 2022 में CBDC का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके बाद रिटेल और होलसेल दोनों सेगमेंट में कई पायलट लॉन्च किए गए। हालांकि, डिजिटल रुपये को अपनाने की रफ्तार अभी कम है।
RBI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में रिटेल CBDC की सर्कुलेशन वैल्यू घटकर ₹771.66 करोड़ रह गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में ₹1,016.46 करोड़ थी।
इसके मुकाबले UPI का इस्तेमाल काफी बड़े स्तर पर हो रहा है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2026 में UPI के जरिए 24.07 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹29.37 लाख करोड़ रही।
क्या MDR से बढ़ेगा डिजिटल रुपया?
S&P Global में MD और सेक्टर लीड, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस रेटिंग्स गीता चुघ का मानना है कि UPI पर MDR लागू होने से डिजिटल रुपये को मिलने वाला फायदा सीमित रह सकता है। उनके मुताबिक UPI आगे भी देश का प्रमुख पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहेगा।
चुघ ने बताया कि RBI ने CBDC को UPI के साथ इंटरऑपरेबल बनाया है। यानी UPI QR कोड का इस्तेमाल करके CBDC ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि, CBDC के लिए अलग वॉलेट डाउनलोड करना और उसमें पैसे ट्रांसफर करना पड़ता है। साथ ही इसमें ब्याज भी नहीं मिलता। इससे इसके इस्तेमाल में कुछ अतिरिक्त परेशानी जुड़ जाती है।

UPI का विकल्प नहीं है CBDC
गीता चुघ के मुताबिक CBDC को UPI के प्रतिद्वंद्वी या उसके विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसकी सबसे बड़ी खासियत पैसे को 'प्रोग्रामेबल' बनाना है।
प्रोग्रामेबल CBDC में पैसे के इस्तेमाल से जुड़े नियम पहले से तय किए जा सकते हैं। कुछ शर्तें पूरी होने पर ही रकम जारी की जा सकती है या उसे किसी खास इस्तेमाल तक सीमित किया जा सकता है।
सब्सिडी से लेकर लोन तक इस्तेमाल
CBDC के कई इस्तेमाल पर पायलट चल चुके हैं। इनमें कार्बन क्रेडिट पेमेंट, टारगेटेड लेंडिंग, सब्सिडी और वेलफेयर ट्रांसफर शामिल हैं।
RBI के मुताबिक 2025-26 में केंद्र और राज्य सरकारों की DBT योजनाओं के तहत भी CBDC पायलट शुरू किए गए। गुजरात, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में PDS लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल CBDC के जरिए फूड सब्सिडी दी गई, जिसे तय वस्तुओं की खरीद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था।
S&P Global का मानना है कि डिजिटल रुपये की सफलता सिर्फ वॉलेट की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। इसे इस आधार पर देखा जाना चाहिए कि यह सब्सिडी लीकेज कम करने, प्रोग्रामेबल लेंडिंग, क्रॉस-बॉर्डर सेटलमेंट की लागत घटाने और सिक्योरिटीज सेटलमेंट को बेहतर बनाने में कितना कारगर साबित होता है।

