चुनाव आयोग की मुश्किलें बढ़ेंगी? सुप्रीम कोर्ट में 3 दर्जन याचिकाओं पर सुनवाई
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई होने वाली है। करीब तीन दर्जन याचिकाओं में आयोग के फैसलों से लेकर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तक कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आखिर याचिकाकर्ताओं की क्या मांग है और आयोग ने क्या जवाब दिया?

In Short
- सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ करीब तीन दर्जन याचिकाओं पर आज सुनवाई होगी।
- याचिकाकर्ताओं ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कथित एकतरफा फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती, आयोग ने हलफनामे में आरोपों को खारिज किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज बड़ी सुनवाई होनी है। अदालत में करीब तीन दर्जन याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, चुनाव आयोग के फैसलों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच और SIR पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं, चुनाव आयोग ने संयुक्त हलफनामा दाखिल कर सभी आरोपों को खारिज किया है।
ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर क्यों उठे सवाल?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इन मामलों की सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति के बिना कई अहम फैसले लिए।
याचिकाओं में मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 फैसलों पर लिखित आपत्ति जताई थी। इनमें मतदाता सूची का प्रबंधन और डेटा को एक जगह रखने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
राकेश कुमार सिंह, अरुण आनंद गिरी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA ब्लॉक के 12 विपक्षी नेताओं ने भी याचिकाएं दाखिल की हैं।
SIR पर रोक और जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं ने महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने और मतदाता पंजीकरण के फॉर्म 6 में कथित बदलाव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाने या SIT से जांच कराने की मांग की है।
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग का कहना है कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में SIR से जुड़े सभी आदेश तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग के मुताबिक, फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है और किसी फाइल पर आपत्ति दर्ज होना अंतिम फैसले से असहमति नहीं माना जा सकता।
2023 के नियुक्ति कानून पर भी विवाद
कुछ याचिकाओं में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती दी गई है। ADR, लोक प्रहरी और कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने चयन समिति की संरचना पर सवाल उठाए हैं।
पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल थे। नए कानून में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे सरकार का बहुमत हो जाता है।
कानूनी संरक्षण पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने कानून की धारा 16 को भी चुनौती दी है, जो चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक कामकाज से जुड़े कुछ मामलों में कानूनी संरक्षण देती है।
इससे पहले नियुक्ति कानून पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एस.सी. शर्मा की राय अलग-अलग रही थी। इसके बाद मामला पांच जजों की संविधान पीठ को भेजने की सिफारिश की गई थी। अब इन विवादों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

