
ईवी और ऑटो सेक्टर के लिए वेदांता की बड़ी तैयारी! ₹21,000 करोड़ निवेश के साथ क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस
भारत में EV इंडस्ट्री की बढ़ती रफ्तार के बीच Vedanta ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने मेटल्स और क्रिटिकल मिनरल्स की क्षमता बढ़ाने पर फोकस किया है। इस निवेश से EV बैटरी, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर को कैसे मिलेगा फायदा, जानिए पूरी कहानी।

In Short
- Vedanta ने FY26 तक मेटल उत्पादन और क्षमता विस्तार में ₹21,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया।
- कंपनी ने कॉपर, निकेल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ समेत अलग-अलग कमोडिटीज में 10 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक हासिल किए।
- EV बैटरी और एनर्जी स्टोरेज के लिए Vedanta जिंक आधारित नई बैटरी टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है।
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और इसके लिए जरूरी मेटल सप्लाई को मजबूत करने की दिशा में Vedanta Group ने बड़ा निवेश किया है। कंपनी ने बताया कि उसने FY26 तक एल्युमिनियम, जिंक, वैल्यू एडेड अलॉय, कॉपर, स्टील, निकेल और फेरोक्रोम जैसे मेटल उत्पादन और क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं में ₹21,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है।
कंपनी का कहना है कि ये निवेश भारत के EV और ऑटो सेक्टर के लिए जरूरी मटेरियल इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद करेगा।
क्रिटिकल मिनरल्स की घरेलू सप्लाई बढ़ाने पर जोर
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में शामिल है। EV की बढ़ती मांग के साथ बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और हल्के वाहन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मेटल्स की जरूरत भी बढ़ रही है।
Vedanta ने बताया कि भारत अपनी क्रिटिकल मिनरल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कंपनी ने क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। Vedanta देश की एकमात्र कंपनी है जिसने कॉपर, निकेल-क्रोमियम-PGE, टंगस्टन, ग्रेफाइट, वैनेडियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और पोटाश जैसे क्षेत्रों में 10 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक हासिल किए हैं। इनमें से पांच ब्लॉक में एक्सप्लोरेशन का काम शुरू हो चुका है।

EV बैटरी और ऑटो इंडस्ट्री के लिए मेटल सपोर्ट
Vedanta के एल्युमिनियम बिजनेस की EV सेक्टर में अहम भूमिका है। कंपनी के मुताबिक एल्युमिनियम का हल्का वजन इलेक्ट्रिक वाहनों की ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और ड्राइविंग रेंज सुधारने में मदद करता है।
FY2025-26 में Vedanta Aluminium Metal Limited ने रिकॉर्ड 24.5 लाख टन एल्युमिनियम उत्पादन किया। कंपनी ऑटो सेक्टर के लिए प्राइमरी फाउंड्री अलॉय, रोल्ड प्रोडक्ट्स, बिलेट्स और स्लैब जैसे उत्पाद उपलब्ध करा रही है।
कंपनी ने कम कार्बन उत्सर्जन वाले ‘ग्रीन एल्युमिनियम’ प्रोडक्ट Restora और Restora Ultra भी पेश किए हैं, जिससे ऑटो कंपनियां अपने मटेरियल सोर्सिंग से जुड़े कार्बन फुटप्रिंट को कम कर सकती हैं।
कॉपर और निकेल की बढ़ती अहमियत
EV में पारंपरिक वाहनों की तुलना में 3-4 गुना ज्यादा कॉपर की जरूरत होती है। Vedanta ने FY2025-26 में रिकॉर्ड 170 किलो टन कैथोड उत्पादन किया, जिसका इस्तेमाल मोटर, केबल, कंडक्टर और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में किया जाता है।
निकेल भी EV बैटरी वैल्यू चेन का अहम हिस्सा है। Vedanta भारत की एकमात्र प्राइमरी निकेल उत्पादक कंपनी है और घरेलू स्तर पर इस मेटल की उपलब्धता बढ़ाने पर काम कर रही है।

बैटरी टेक्नोलॉजी पर भी काम जारी
Vedanta ने बताया कि वह EV और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर के लिए नई बैटरी टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है। कंपनी IIT मद्रास और JNCASR के साथ मिलकर जिंक आधारित सस्टेनेबल बैटरी सॉल्यूशन विकसित कर रही है।
कंपनी के CEO अरुण मिश्रा ने कहा कि EV के विस्तार के साथ भारत की सफलता मेटल्स और क्रिटिकल मिनरल्स की भरोसेमंद सप्लाई पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर इन क्षमताओं को विकसित करना भारत की भविष्य की मोबिलिटी जरूरतों के लिए जरूरी है।

