
अरबों की दौलत और फैमिली बिजनेस का भविष्य दांव पर! भारत में Succession Crisis से बढ़ी बड़ी कंपनियों की चिंता
भारत के बड़े कारोबारी घराने अब उत्तराधिकार की चुनौती से जूझ रहे हैं। अरबों डॉलर की संपत्ति अगली पीढ़ी को ट्रांसफर होने के बीच परिवार के नियंत्रण, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और युवा वारिसों की बदलती सोच ने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जानिए क्यों बढ़ रही है बिजनेस डाइनैस्टी में चिंता।

In Short
- भारत के बड़े कारोबारी घरानों में अगली पीढ़ी को कमान सौंपना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
- अगले 15 साल में भारतीय अरबपतियों की 382 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति वारिसों को मिल सकती है।
- कई युवा वारिस पारंपरिक कारोबार संभालने के बजाय निवेश और नए कामों में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।
भारत के बड़े कारोबारी परिवारों में अब अगली पीढ़ी को कारोबार की कमान सौंपना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के नियंत्रण, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और नई पीढ़ी की बदलती प्राथमिकताओं के कारण कई बड़े बिजनेस ग्रुप में उत्तराधिकार का सवाल गंभीर होता जा रहा है।
अगले 15 साल में $382 अरब की संपत्ति होगी ट्रांसफर
भारत दुनिया के सबसे बड़े पीढ़ीगत संपत्ति हस्तांतरण में से एक की ओर बढ़ रहा है। UBS के अनुमान के मुताबिक, अगले 15 साल में भारतीय अरबपतियों के वारिसों को 382 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति मिल सकती है। अमेरिका के बाहर यह दुनिया में सबसे ज्यादा मानी जा रही है।
भारत के बड़े कारोबारी समूह रोजगार, निवेश और देश में पूंजी लगाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन कंपनियों की कमान भविष्य में किसके हाथ में जाएगी, इसका महत्व और बढ़ गया है।
परिवार और प्रोफेशनल अधिकारियों के बीच चुनौती
कई कारोबारी परिवार अभी भी कंपनियों पर अपना मजबूत नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। वहीं बाहर से लाए गए प्रोफेशनल अधिकारियों को काम करने की आजादी देने को लेकर भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के समय में दो बड़ी भारतीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने संस्थापक परिवार के सदस्यों के साथ मतभेद के बाद पद छोड़ दिया।
Reliance और Adani में नई पीढ़ी तैयार
Reliance Industries और Adani Group जैसे बड़े समूह अपनी अगली पीढ़ी को कारोबार में आगे ला रहे हैं। मुकेश अंबानी के तीनों बच्चे समूह के कंज्यूमर, टेक्नोलॉजी और न्यू एनर्जी बिजनेस संभाल रहे हैं। वहीं गौतम अडानी के दो बेटे और दो भतीजे आने वाले वर्षों में समूह की जिम्मेदारी संभालने की कतार में हैं।
हालांकि हर कारोबारी परिवार की स्थिति ऐसी नहीं है। HSBC Private Banking की एक रिपोर्ट में शामिल करीब आधे भारतीय उद्यमियों के पास उत्तराधिकार की स्पष्ट योजना नहीं थी, जबकि 88% अपना कारोबार परिवार के भीतर रखना चाहते थे।
नई पीढ़ी की बदल रही पसंद
एक और चुनौती यह है कि कई युवा वारिस पुराने तरीके से पारिवारिक कारोबार चलाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कुछ युवा कारोबार के रोजमर्रा के संचालन की जगह फैमिली ऑफिस बनाकर अपनी विरासत की संपत्ति को निवेश करने में रुचि रखते हैं।
ऐसे में भारतीय कारोबारी घरानों के सामने सिर्फ उत्तराधिकारी चुनना ही नहीं, बल्कि परिवार और प्रोफेशनल मैनेजमेंट के बीच सही संतुलन बनाना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
