scorecardresearch

पुतिन के दूत ने ट्रंप के फैसले को सराहा! रूस पर नए प्रतिबंधों से राहत, तेल कारोबार पर भी पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध लागू करने पर रोक लगा दी है। पुतिन के दूत किरिल दिमित्रिएव ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। इससे भारत और चीन पर भारी टैरिफ का खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, अमेरिका में इस फैसले का विरोध भी हो रहा है।

Advertisement

In Short

  • रूस पर नए प्रतिबंध रोकने के ट्रंप के फैसले को बताया ऐतिहासिक।
  • भारत और चीन पर 100% टैरिफ का खतरा फिलहाल टला।
  • ट्रंप के फैसले पर अमेरिकी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उठाए सवाल।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंध लागू करने पर रोक लगा दी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दूत किरिल दिमित्रिएव ने इस फैसले को 'ऐतिहासिक पल' बताया है। ट्रंप ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके नए प्रतिबंधों को रोक दिया। ये प्रतिबंध 18 अक्टूबर से लागू होने वाले थे। इस फैसले से रूस के साथ-साथ भारत और चीन को भी राहत मिली है।

advertisement

पुतिन के दूत ने ट्रंप के फैसले को बताया ऐतिहासिक

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किरिल दिमित्रिएव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का ग्राहम एक्ट को रोकने का फैसला बेहद अहम और ऐतिहासिक है।

अमेरिकी प्रशासन ने कांग्रेस को बताया कि नए प्रतिबंधों को रोकने का फैसला अमेरिका के राष्ट्रीय हित में लिया गया है। ट्रंप ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इन प्रतिबंधों को फिलहाल लागू नहीं करने का फैसला किया है।

क्या है ग्राहम एक्ट और भारत को कैसे मिली राहत?

ग्राहम एक्ट पर ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे। इसे अमेरिकी कांग्रेस में दोनों प्रमुख दलों का समर्थन मिला था।

इस कानून का मकसद रूस के बैंकों, रक्षा क्षेत्र, वरिष्ठ अधिकारियों और तेल ढुलाई करने वाले 'शैडो फ्लीट' पर प्रतिबंध लगाना था।

इसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इनमें भारत और चीन भी शामिल थे।

इसके अलावा, रूस से अमेरिका आने वाले ऊर्जा उत्पादों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। नए प्रतिबंध रुकने से भारत और चीन पर अतिरिक्त टैरिफ का खतरा फिलहाल टल गया है।

तेल की कीमतों को लेकर भी अहम फैसला

यूक्रेन और ईरान से जुड़े संघर्षों के बीच ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने रूस के साथ वैश्विक बाजार में डीजल की आपूर्ति बढ़ाने का समझौता किया है। इसका मकसद ईंधन की कीमतें कम करने में मदद करना है।

इसी के तहत 9 अक्टूबर को रूसी ईंधन निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी गई थी।

अमेरिका और रूस के बीच निवेश पर भी चर्चा

दिमित्रिएव के मुताबिक, ग्राहम एक्ट लागू होने से अमेरिका और रूस के बीच बचा हुआ आर्थिक सहयोग लगभग खत्म हो सकता था।

उन्होंने दोनों देशों के बीच संभावित संयुक्त निवेश की बातचीत का भी जिक्र किया। इनमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाले डेटा सेंटर जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

अमेरिका में ट्रंप के फैसले का विरोध

advertisement

ट्रंप के फैसले की अमेरिकी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आलोचना की है। डेमोक्रेटिक सांसद डॉन बेयर ने इसे पुतिन के सामने झुकने जैसा कदम बताया।

आलोचकों का कहना है कि रूस को ईंधन निर्यात में छूट मिलने से उसकी सैन्य गतिविधियों को आर्थिक मदद मिल सकती है।

हालांकि, ट्रंप के इस आदेश से रूस पर पहले से लागू अमेरिकी प्रतिबंध खत्म नहीं हुए हैं। केवल नए प्रतिबंधों को लागू करने पर रोक लगाई गई है।