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लोन की EMI कम होने का इंतजार कर रहे लोगों को लग सकता है झटका! RBI ने ब्याज दरों पर दिया ये संकेत

लोन की EMI कम होने का इंतजार कर रहे लोगों को RBI ने बड़ा झटका दिया है। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि फिलहाल रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश नहीं है, बल्कि ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं। आखिर RBI ने ऐसा क्यों कहा और दिसंबर की बैठक में क्या होगा? पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • RBI ने फिलहाल रेपो रेट में कटौती की संभावना से इनकार किया।
  • अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ाकर 5.5% किया गया था।
  • अगली MPC बैठक 2 से 4 दिसंबर के बीच होगी।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों को लेकर बड़ा संकेत दिया है। RBI के मुताबिक, फिलहाल रेपो रेट में कटौती की कोई संभावना नहीं है। आने वाले समय में ब्याज दरें या तो मौजूदा स्तर पर बनी रह सकती हैं या फिर इनमें बढ़ोतरी हो सकती है। अक्टूबर की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के मिनट्स में यह बात सामने आई है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन महंगाई और वैश्विक हालात अब भी चुनौती बने हुए हैं।

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फिलहाल रेपो रेट में कटौती की उम्मीद नहीं

RBI ने अक्टूबर MPC बैठक के मिनट्स में साफ किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती का विकल्प नहीं है।

केंद्रीय बैंक के मुताबिक, आगे रेपो रेट बढ़ाने या उसे स्थिर रखने का फैसला महंगाई और आर्थिक विकास की स्थिति को देखकर लिया जाएगा।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला कितने समय तक चलेगा और दरें कितनी बढ़ेंगी, यह महंगाई के दबाव और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर निर्भर करेगा।

अक्टूबर में 5.5% हुआ रेपो रेट

अक्टूबर की MPC बैठक में RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी बढ़ाकर 5.5 फीसदी कर दिया था।

इस फैसले पर समिति के सभी सदस्यों ने सहमति जताई थी। अब RBI की अगली मौद्रिक नीति समिति की बैठक 2 से 4 दिसंबर के बीच होगी।

इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर अगला फैसला लिया जाएगा। हालांकि, RBI के ताजा संकेतों से फिलहाल दरों में कटौती की उम्मीद कम नजर आ रही है।

महंगाई को लेकर RBI की चिंता बढ़ी

RBI का कहना है कि महंगाई की स्थिति पिछले साल जैसी राहत देने वाली नहीं है।

केंद्रीय बैंक के अनुमान के मुताबिक, अगले तीन तिमाहियों में खुदरा महंगाई दर (CPI) औसतन करीब 5.8 फीसदी रह सकती है।

वहीं, इस साल कोर महंगाई दर 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है। कोर महंगाई में खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों को शामिल नहीं किया जाता।

RBI के मुताबिक, इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ब्याज दरों में बदलाव करना जरूरी हो गया था।

महंगाई बढ़ने की क्या है वजह?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सप्लाई से जुड़ी समस्याओं के कारण बढ़ने वाली महंगाई का असर दूसरी चीजों पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि ऊर्जा और अन्य जरूरी सामान की लागत बढ़ने से कंपनियों का उत्पादन खर्च प्रभावित होता है। इसके चलते कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा सकती हैं।

इसके अलावा कर्मचारियों की वेतन संबंधी उम्मीदें भी महंगाई के दबाव को बढ़ा सकती हैं।

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आगे किस बात पर रहेगी नजर?

RBI के मुताबिक, बाजार में पैसे की उपलब्धता और कर्ज में बढ़ोतरी से भी मांग बढ़ने का जोखिम है।

केंद्रीय बैंक आने वाले समय में महंगाई, आर्थिक विकास और कीमतों पर बढ़ते दबाव का आकलन करेगा। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर दिसंबर की बैठक में रेपो रेट बढ़ाने या स्थिर रखने का फैसला होगा।