
RBI का नया नियम बढ़ाएगा फ्रीलांसरों की टेंशन! विदेशी कमाई पर अब भरना होगा ये फॉर्म, जानें पूरा नियम
विदेशी क्लाइंट्स से कमाई करने वाले फ्रीलांसर, यूट्यूबर, कंटेंट क्रिएटर और कंसल्टेंट के लिए RBI का नया नियम चर्चा में है। नए EDF नियम के बाद सर्विस एक्सपोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया में एक और जरूरी काम जुड़ गया है। एक्सपर्ट्स इस नियम पर सवाल क्यों उठा रहे हैं, जानिए पूरी डिटेल।

In Short
- RBI का नया ईडीएफ नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है।
- फ्रीलांसर, यूट्यूबर, कंटेंट क्रिएटर और कंसल्टेंट समेत कई सर्विस एक्सपोर्टर्स इसके दायरे में आएंगे।
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए नियम से फाइलिंग और बैंकिंग कोऑर्डिनेशन का काम बढ़ सकता है।
विदेशी क्लाइंट्स से अपनी सेवाओं के बदले पैसा कमाने वाले लोगों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नया नियम चर्चा में है। RBI के नए Foreign Exchange Management (Export and Import of Goods and Services) Regulations, 2026 एक अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। इसके तहत सर्विस एक्सपोर्ट करने वालों को Export Declaration Form यानी EDF भरकर अपने एक्सपोर्ट की पूरी वैल्यू बतानी होगी।
किन लोगों पर पड़ेगा असर?
यह नियम फ्रीलांसर, कंटेंट क्रिएटर, यूट्यूबर, इन्फ्लुएंसर, कंसल्टेंट, एजेंसी और विदेश में अपनी सेवाएं देने वाले दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स पर असर डाल सकता है। इसके अलावा डिजाइन, कंटेंट, मार्केटिंग, वीडियो और एनिमेशन स्टूडियो, BPO/KPO, बुककीपिंग प्रोवाइडर्स और Upwork, Fiverr और Toptal जैसे प्लेटफॉर्म से काम करने वाले फ्रीलांसर भी इसके दायरे में आएंगे।
विदेशी छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने या कोचिंग देने वाले लोग और विदेश में मौजूद ग्रुप कंपनियों को सर्विस देने वाली कंपनियां भी इससे प्रभावित होंगी।
कब भरना होगा EDF?
नए नियम के तहत सर्विस एक्सपोर्टर को जिस महीने सर्विस का इनवॉइस जारी किया गया है, उस महीने के खत्म होने के 30 दिनों के भीतर अपने एडी बैंक के जरिए ईडीएफ भरना होगा। इसी बैंक के जरिए विदेशी पेमेंट प्राप्त किया जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर इनवॉइस अक्टूबर 2026 में जारी किया गया है तो ईडीएफ भरने की आखिरी तारीख 30 नवंबर 2026 होगी। सॉफ्टवेयर के अलावा दूसरी सर्विसेज के मामले में घरेलू टैरिफ एरिया का Authorised Dealer यानी AD संबंधित अथॉरिटी होगा। ईडीएफ मिलने के बाद एडी बैंक पांच वर्किंग डेज में इसकी जानकारी Export Data Processing and Monitoring System यानी EDPMS में दर्ज करेगा।
RBI के नियमों के मुताबिक, सर्विसेज की पूरी एक्सपोर्ट वैल्यू आमतौर पर इनवॉइस की तारीख से 9 महीने के भीतर भारत में वापस लानी होगी।

एक्सपर्ट्स ने क्यों उठाए सवाल?
कैपिटलमाइंड म्यूचुअल फंड के सीईओ दीपक शेनॉय ने नियम की आलोचना करते हुए कहा कि यह सिर्फ जिंदा रहने के लिए भी फॉर्म भरने जैसा है।
JauntLabs के फाउंडर अमित रंजन ने कहा कि इससे ज्यादा फाइलिंग और बैंकिंग कोऑर्डिनेशन की जरूरत पड़ेगी। उनके मुताबिक इसका ज्यादा असर फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, एक से तीन सदस्यों वाली IT और डेवलपमेंट फर्मों और SMEs पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इससे एक्सपोर्ट, ट्रांजैक्शन, पेमेंट और कैश फ्लो की रफ्तार धीमी हो सकती है।
प्रोफेशनल ट्रेडर और मार्केट कमेंटेटर संदीप सिंह अहलूवालिया ने इसे बहुत पीछे ले जाने वाला नियम बताया। अर्थमेट्री के को-फाउंडर गौतम प्रधान ने भी सवाल उठाया कि जब FIRC और GST जैसी व्यवस्था पहले से है तो अतिरिक्त कंप्लायंस की जरूरत क्यों है।
क्या सिर्फ डॉलर पेमेंट पर लागू होगा नियम?
ईडीएफ की जरूरत केवल अमेरिकी डॉलर में मिलने वाले पेमेंट तक सीमित नहीं है। अगर कोई ट्रांजैक्शन FEMA के तहत सर्विस एक्सपोर्ट माना जाता है तो विदेशी करेंसी कोई भी हो, यह नियम लागू हो सकता है।
नियम में कुछ राहत भी
हर इनवॉइस के लिए अलग-अलग ईडीएफ भरना जरूरी नहीं होगा। एक महीने में जारी सभी सर्विस इनवॉइस को एक ईडीएफ में शामिल किया जा सकता है, भले ही क्लाइंट्स की संख्या कितनी भी हो।
अगर ईडीएफ भरने में देरी होती है तो एक्सपोर्टर कारण बताते हुए बैंक से समय बढ़ाने की मांग कर सकता है। बैंक कारणों पर विचार करने के बाद समय बढ़ा सकता है। सॉफ्टवेयर के अलावा दूसरी सर्विसेज के मामले में पेमेंट मिलने की तारीख तक या उससे पहले भी ईडीएफ जमा किया जा सकता है।

