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RBI MPC Meeting: महंगाई और $100 पार कच्चे तेल की चुनौती, क्या बढ़ेगा रेपो रेट? 7 अक्टूबर को फैसला

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की बैठक आज से शुरू हो गई है। बाजार की नजर अब 7 अक्टूबर को आने वाले फैसले पर है। महंगाई के बढ़ते दबाव और 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल RBI के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन की बैठक आज से शुरू हो रही है। वित्तीय बाजारों की नजर इस बात पर है कि बढ़ती वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू महंगाई केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों की दिशा बदलने के लिए मजबूर करेगी या नहीं। MPC अपने फैसले की घोषणा 7 अक्टूबर को करेगी।

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5.25% पर रेपो रेट स्थिर

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति पिछले चार लगातार समीक्षा बैठकों में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रख चुकी है। इससे पहले RBI ने 2025 में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी। अब महंगाई, कमजोर रुपया और वैश्विक स्तर पर सख्त होती मौद्रिक नीति ने दरों पर दबाव बढ़ा दिया है।

महंगाई इस बैठक में RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई, जो आठ महीने का उच्च स्तर है। यह लगातार तीसरा महीना रहा जब महंगाई RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर रही।

$100 के पार कच्चा तेल बढ़ा रहा चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को भी ऊपर धकेला है। Brent क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। महंगा ईंधन परिवहन लागत बढ़ा सकता है और इसका असर कई क्षेत्रों की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे आयातित महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

क्या RBI बढ़ाएगा ब्याज दर?

दरें बढ़ाने को लेकर बाजार में राय बंटी हुई है। रॉयटर्स के एक सर्वे में करीब 60% अर्थशास्त्रियों ने अक्टूबर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया। इससे रेपो रेट 5.50% हो सकता है।

हालांकि, कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि RBI घरेलू मांग को सहारा देने के लिए दरों को 5.25% पर ही बनाए रख सकता है, खासकर त्योहारी सीजन से पहले। ऐसे में MPC के सामने महंगाई पर काबू पाने और उपभोक्ता मांग को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।