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IndiGo को इंटरनेशनल उड़ानों में बड़ा झटका! घट रही बाजार हिस्सेदारी, Air India ने ऐसे बदला पूरा खेल

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को इंटरनेशनल मार्केट में बड़ा झटका लगा है। विदेश जाने वाली उड़ानों में उसकी हिस्सेदारी लगातार घट रही है, जबकि एयर इंडिया तेजी से आगे बढ़ रही है। आखिर इंडिगो की मुश्किलें क्यों बढ़ीं और कंपनी ने अपनी उड़ानों को लेकर क्या बड़ा फैसला लिया है? जानिए पूरी खबर।

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AI Generated Image

In Short

  • जून में इंडिगो की इंटरनेशनल मार्केट हिस्सेदारी 54% थी, जो सितंबर 2026 में घटकर 47.4% रह गई।
  • एयर इंडिया ग्रुप की हिस्सेदारी जून के 40.8% से बढ़कर सितंबर में 46.8% पहुंच गई।
  • इंडिगो ने 25 अक्टूबर से छह बोइंग 787-9 विमानों का ऑपरेशन बंद किया, जबकि 60 नए एयरबस A350-900 विमानों का ऑर्डर बरकरार है।

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) के लिए इंटरनेशनल मार्केट में चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। ब्लूमबर्ग के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, विदेशी उड़ानों में इंडिगो की हिस्सेदारी घट रही है, जबकि एयर इंडिया (Air India) अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। घरेलू बाजार में इंडिगो का दबदबा अब भी कायम है। ऐसे में जानते हैं कि दोनों एयरलाइंस के बीच मुकाबला कैसे बदल रहा है और इसके पीछे क्या वजह है।

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इंटरनेशनल मार्केट में एयर इंडिया ने कैसे की वापसी?

ब्लूमबर्ग के हवाले से ब्रोकरेज फर्म इक्विरस सिक्योरिटीज (Equirus Securities) की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारतीय एयरलाइंस के इंटरनेशनल पैसेंजर मार्केट में एयर इंडिया ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़कर 46.8% पहुंच गई। इसमें महीने के आधार पर 275 बेसिस पॉइंट और सालाना आधार पर 18 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इसी दौरान इंडिगो की हिस्सेदारी घटकर 47.4% रह गई। इसमें महीने के आधार पर 187 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई, हालांकि सालाना आधार पर 5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई। अब दोनों एयरलाइंस के बीच सिर्फ 0.6 प्रतिशत पॉइंट का अंतर रह गया है।

जून से लगातार घट रही इंडिगो की हिस्सेदारी

ब्लूमबर्ग के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि जून 2026 में इंडिगो की इंटरनेशनल मार्केट हिस्सेदारी 54% थी, जो सितंबर में घटकर 47.4% रह गई। दूसरी तरफ एयर इंडिया ग्रुप की हिस्सेदारी इसी दौरान 40.8% से बढ़कर 46.8% पहुंच गई।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में दबाव के बावजूद घरेलू उड़ानों में इंडिगो की मजबूत पकड़ बनी हुई है। सितंबर 2026 में घरेलू पैसेंजर मार्केट में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 65.2% हो गई। हालांकि, पिछले महीने के मुकाबले यात्रियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई।

इंडिगो ने क्यों बंद किया बड़े विमानों का ऑपरेशन?

ब्लूमबर्ग के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इंडिगो ने 25 अक्टूबर से अपने वाइड-बॉडी विमानों का ऑपरेशन बंद कर दिया है। कंपनी ने नॉर्वे की एयरलाइन नॉर्स अटलांटिक से लीज पर लिए गए छह बोइंग 787-9 विमान वापस कर दिए हैं। इन विमानों का इस्तेमाल लंदन और यूरोप के रूट्स पर किया जा रहा था।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कंपनी ने इसके पीछे जियोपॉलिटिकल चुनौतियों, महंगे जेट फ्यूल और डॉलर की मजबूती को बड़ी वजह बताया है। हवाई रास्तों पर पाबंदियों से उड़ानों की टाइमिंग, कनेक्टिविटी और लागत पर भी असर पड़ा है।

ब्लूमबर्ग के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, अब मुंबई-मैनचेस्टर रूट पर एयरबस A321XLR विमान का इस्तेमाल होगा। वहीं, लंदन हीथ्रो की उड़ानें एयरबस A350-900 विमानों की डिलीवरी तक बंद रहेंगी।

क्या इंटरनेशनल विस्तार की योजना पर लगेगा ब्रेक?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इंडिगो ने साफ किया है कि वह इंटरनेशनल मार्केट में विस्तार की अपनी लंबी अवधि की योजना पर कायम है। कंपनी ने 60 एयरबस A350-900 वाइड-बॉडी विमानों का ऑर्डर दिया है।

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ब्लूमबर्ग के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इन विमानों की पहली डिलीवरी 2028 की शुरुआत तक मिलने की उम्मीद है। यानी फिलहाल इंडिगो अपने इंटरनेशनल ऑपरेशन में बदलाव कर रही है, जबकि एयर इंडिया तेजी से दोनों के बीच का अंतर कम कर रही है।