
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई टेंशन! दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया
भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच रुपया दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। शेयर बाजार में भी कमजोरी है। आखिर रुपये पर क्यों बढ़ रहा दबाव और RBI क्या कदम उठा सकता है?

In Short
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच रुपया दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचा, डॉलर के मुकाबले 96.1537 तक गिरा।
- डॉलर इंडेक्स में मजबूती और शेयर बाजार की कमजोरी से रुपये पर दबाव, RBI के हस्तक्षेप की उम्मीद।
- लगातार चार दिनों की गिरावट के बाद बॉन्ड बाजार में सुधार, 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 7.16% हुई।
भारतीय रुपये में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार दूसरे दिन कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से रुपया दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इससे भारत के विदेशी भुगतान पर दबाव बढ़ने की चिंता है। वहीं, शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली, जबकि लगातार चार दिनों की गिरावट के बाद बॉन्ड बाजार में कुछ सुधार आया है।
डॉलर के मुकाबले कितना गिरा रुपया?
डॉलर के मुकाबले रुपया 0.2% तक कमजोर होकर 96.1537 के स्तर पर पहुंच गया। यह 27 जुलाई के बाद रुपये का सबसे कमजोर स्तर है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एफएक्स एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के अलावा डॉलर इंडेक्स में मजबूती और घरेलू शेयर बाजार की कमजोरी भी रुपये पर दबाव डाल रही है।
उनका अनुमान है कि इस हफ्ते आरबीआई रुपये को स्थिर करने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने डॉलर के मुकाबले रुपये के 95.80 से 96.30 के दायरे में रहने की संभावना जताई है।
शेयर बाजार में भी गिरावट
रुपये की कमजोरी के बीच भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 और सेंसेक्स में 0.3% की गिरावट दर्ज की गई।
सोसाइटी जेनरल के एफएक्स स्ट्रैटेजिस्ट गैल्विन चिया ने अपने नोट में कहा कि कच्चे तेल की कीमतों के लिहाज से भारतीय बाजार सबसे ज्यादा संवेदनशील नजर आ रहा है।

चार दिन बाद बॉन्ड बाजार को राहत
लगातार चार दिनों की बिकवाली के बाद भारतीय बॉन्ड बाजार में खरीदारी लौटी। 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 2 बेसिस पॉइंट घटकर 7.16% पर आ गई। इससे पहले यह अप्रैल 2024 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी।
वहीं, पांच साल के बॉन्ड की यील्ड 4 बेसिस पॉइंट घटकर 6.84% रही। भारतीय राज्य 22,200 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने के लिए बॉन्ड बेचने वाले हैं।
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के फिक्स्ड इनकम प्रमुख देवेंद्र दाश के मुताबिक, हालिया भारी बिकवाली के बाद बॉन्ड यील्ड ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जहां कुछ खरीदार दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि, आरबीआई की हालिया ओएमओ बिक्री से बाजार का सेंटीमेंट अब भी कमजोर है।
RBI के कदमों पर बाजार की नजर
आरबीआई को ओवरनाइट वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो नीलामी में 1.2 लाख करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं। इस नीलामी के जरिए 2 लाख करोड़ रुपये तक की नकदी निकालने की योजना थी।
आरबीआई ने अस्थायी रूप से एक लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त नकदी निकालने के लिए ऐसी ही एक और नीलामी की घोषणा की है।
आईसीआईसीआई बैंक के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, आरबीआई के कदमों के बावजूद बाजार में अतिरिक्त नकदी कम होने में समय लग सकता है।
वहीं, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता से बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रह सकती है। निकट भविष्य में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.10% से 7.25% के बीच रहने का अनुमान है।
