HSBC का भारत के सरकारी बॉन्ड पर बड़ा दांव! $3 अरब का निवेश; RBI की डॉलर स्कीम से जुटाया पैसा
HSBC ने भारत के सरकारी बॉन्ड में बड़ा निवेश किया है। बैंक ने जुलाई से अब तक कम से कम 3 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीदे हैं। यह निवेश RBI की FCNR(B) योजना के तहत जुटाए गए फंड से किया गया है। HSBC का यह कदम भारतीय बॉन्ड बाजार और रुपये के लिए अहम माना जा रहा है।

HSBC Holdings Plc ने जुलाई से अब तक भारत के सरकारी बॉन्ड में कम से कम 3 अरब डॉलर का निवेश किया है। ब्लूमबर्ग ने मामले से परिचित लोगों के मुताबिक बताया कि बैंक ने यह रकम RBI की खास विदेशी मुद्रा जमा योजना के तहत जुटाए फंड को लगाने के लिए इस्तेमाल की है। HSBC ने पिछले कुछ महीनों में करीब पांच साल की मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड खरीदे हैं।
FCNR(B) योजना से HSBC ने जुटाए अरबों डॉलर
HSBC ने RBI की Foreign Currency Non-Resident (FCNR(B)) योजना के तहत ग्लोबल प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले ज्यादा फंड जुटाए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 30 जुलाई तक बैंक ने इस योजना के तहत 6.3 अरब डॉलर जुटाए थे। लोगों के मुताबिक, अब HSBC की कुल जुटाई गई रकम 10 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई है।
RBI की डॉलर स्कीम से बॉन्ड बाजार को सहारा
HSBC की बॉन्ड खरीद बताती है कि RBI की डॉलर जुटाने की पहल ने रुपये के साथ-साथ सरकारी बॉन्ड बाजार को भी सहारा दिया है। विदेशी पूंजी के बड़े प्रवाह से बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ी है, जिससे भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों की मांग मजबूत हुई है।
5 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 5 जून से करीब 31 बेसिस पॉइंट घट चुकी है। इसी अवधि में 10 साल की बेंचमार्क यील्ड में करीब 12 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई है। कम बॉन्ड यील्ड से सरकार और अर्थव्यवस्था की उधारी लागत को कुछ राहत मिलती है।
बैंक डॉलर को रुपये में बदलकर कर रहे निवेश
RBI की योजना के तहत बैंकों को सीमित अवधि के लिए रियायती दर पर केंद्रीय बैंक के साथ डॉलर को रुपये में बदलने की सुविधा दी गई है। इससे बैंकों का करेंसी रिस्क घटता है और वे विदेशी ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दरें दे सकते हैं।
डॉलर को रुपये में बदलने के बाद बैंकों के पास बड़ी मात्रा में घरेलू मुद्रा आती है, जिसे उन्हें निवेश करना होता है। RBI के मुताबिक, बैंकों ने इस योजना के तहत कुल 65.4 अरब डॉलर जुटाए हैं।
इस बीच, पिछले सप्ताह भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी करीब 4 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो अप्रैल के बाद सबसे ज्यादा है। इससे घरेलू बॉन्ड बाजार को भी समर्थन मिला है।
