हरियाणा में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को 4 महीने की राहत, जानें किन बिल्डरों को मिलेगा फायदा
हरियाणा में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की समय सीमा में चार महीने की राहत दी गई है। सप्लाई में परेशानी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतों से प्रभावित योग्य प्रोजेक्ट्स को इस फैसले से राहत मिलेगी।

In Short
- HRERA ने योग्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की पूरी होने की समय सीमा चार महीने बढ़ाई
- सामान की कमी और सप्लाई में रुकावट से प्रभावित प्रोजेक्ट्स को मिलेगा फायदा
- बिल्डरों को अलग से आवेदन किए बिना मिलेगी समय सीमा बढ़ाने की राहत
Haryana Housing Projects: हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) ने योग्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की समय सीमा में चार महीने की बढ़ोतरी दी है। यह राहत उन प्रोजेक्ट्स को मिलेगी, जो सामान की कमी, सप्लाई में परेशानी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतों के कारण प्रभावित हुए हैं। ये समस्याएं पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी बताई गई हैं।
रियल एस्टेट कंपनियों का कहना है कि इस फैसले से बिल्डरों को निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने और देरी के कारण होने वाले नियमों से जुड़े दबाव से बचने में मदद मिलेगी।
किन प्रोजेक्ट्स को मिलेगा फायदा?
HRERA के आदेश के अनुसार, चार महीने की यह राहत हरियाणा रेरा में रजिस्टर्ड योग्य प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी। इसमें वे प्रोजेक्ट शामिल होंगे जिनकी मूल, संशोधित या बढ़ाई गई पूरी होने की तारीख 28 फरवरी 2026 या उसके बाद की है। इस राहत के लिए बिल्डरों को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।
हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। यह आदेश उन प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा जो 31 जुलाई 2026 तक रजिस्टर्ड थे। इसके अलावा वे प्रोजेक्ट भी शामिल होंगे, जिनके लिए 31 जुलाई 2026 तक समय बढ़ाने या जारी रखने की मंजूरी दी गई थी। इन शर्तों के बाहर आने वाले प्रोजेक्ट्स को यह चार महीने की राहत अपने आप नहीं मिलेगी।
RERA एक्ट के तहत लिया गया फैसला
HRERA ने यह आदेश रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2016 की अलग-अलग धाराओं के तहत जारी किया है। यह फैसला 31 जुलाई को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) की ओर से जारी सलाह के बाद लिया गया है।
इससे पहले कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CREDAI) ने मंत्रालय से अपील की थी कि सप्लाई और निर्माण से जुड़ी परेशानियों से प्रभावित प्रोजेक्ट्स को तीन से छह महीने तक की राहत दी जाए।
निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद
रूट्स डेवलपर्स के डायरेक्टर राजन यादव ने कहा कि इस फैसले से बिल्डरों को सामान की कमी और बढ़ती लागत के बीच काम संभालने के लिए जरूरी समय मिलेगा।
उनके अनुसार, सप्लाई में परेशानी के दौरान जबरदस्ती तय समय में काम पूरा करने का दबाव निर्माण की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। समय बढ़ने से कंपनियां स्टील और सीमेंट जैसे जरूरी सामान की व्यवस्था बेहतर तरीके से कर सकेंगी और साइट पर काम सही तरीके से जारी रख पाएंगी।
बिल्डरों पर कम होगा दबाव
एएनएचएडी डेवलपर्स के सीईओ आदिल अल्ताफ ने इस फैसले को सेक्टर के लिए व्यावहारिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी सप्लाई और लॉजिस्टिक्स की परेशानियों को देखते हुए बिल्डरों को काम पूरा करने में ज्यादा सुविधा मिलेगी।
उनके मुताबिक, इस कदम से देरी पर लगने वाले गलत जुर्माने का खतरा कम होगा और जल्दबाजी में काम करने से प्रोजेक्ट की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी।
होमबायर्स पर क्या होगा असर?
इस फैसले का असर घर खरीदने वालों पर भी पड़ेगा। प्रोजेक्ट पूरा होने में चार महीने की देरी हो सकती है, जिससे खरीदारों को कुछ समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।
हालांकि, रियल एस्टेट कंपनियों का कहना है कि यह राहत लंबे समय में प्रोजेक्ट को बेहतर तरीके से पूरा करने में मदद करेगी। इससे अधूरे प्रोजेक्ट, खराब गुणवत्ता और बिल्डरों की वित्तीय परेशानी जैसे बड़े जोखिमों को कम किया जा सकता है।
HRERA का यह फैसला बिल्डरों को सप्लाई और निर्माण से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए अतिरिक्त समय देगा, ताकि प्रोजेक्ट तय गुणवत्ता के साथ पूरे किए जा सकें।

