खुश नहीं हैं तो ऑफिस मत आइए! चीन की कंपनी की ‘अनहैप्पी लीव’ पॉलिसी पर भारत में छिड़ी नई बहस
चीन की पैंग डोंग लाई कंपनी की ‘अनहैप्पी लीव’ पॉलिसी ने भारत में भी नई बहस छेड़ दी है। हर्ष गोयनका ने सवाल उठाया है कि क्या भारतीय कंपनियों को भी कर्मचारियों के लिए ऐसी छुट्टी देनी चाहिए, जिसमें खराब मूड या नाखुशी की स्थिति में वे काम से ब्रेक ले सकें।

In Short
- पैंग डोंग लाई अपने कर्मचारियों को 10 दिन की वेतन सहित ‘अनहैप्पी लीव’ देती है।
- हर्ष गोयनका ने पूछा कि क्या भारतीय कंपनियों में भी ऐसी पॉलिसी की जरूरत है।
- इस चर्चा के बाद वर्क-लाइफ बैलेंस, मानसिक स्वास्थ्य और कर्मचारी कल्याण फिर चर्चा में आ गए हैं।
Unhappy Leave Policy: अगर आपका मूड खराब है या आप खुश महसूस नहीं कर रहे हैं, तो ऑफिस आने की जरूरत नहीं है। यह नियम भारत का नहीं, बल्कि चीन की एक रिटेल कंपनी का है। अब इस पॉलिसी का जिक्र करते हुए आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने सवाल उठाया है कि क्या भारतीय कंपनियों को भी कर्मचारियों के लिए ऐसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
हर्ष गोयनका की पोस्ट ने खींचा ध्यान
हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चीनी रिटेलर पैंग डोंग लाई की ‘अनहैप्पी लीव पॉलिसी’ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह कंपनी अपने कर्मचारियों को 10 दिन की वेतन सहित ‘अनहैप्पी लीव’ देती है।
गोयनका ने कंपनी के फाउंडर यू डोंगलाई के विचार का भी जिक्र किया। इसके मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी खुश नहीं है तो उसे काम पर आने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी लिखा कि रिपोर्ट्स के अनुसार मैनेजमेंट को ऐसी छुट्टी की मांग को ठुकराने की अनुमति नहीं है।
क्या भारतीय कंपनियों में भी हो ऐसी पॉलिसी?
हर्ष गोयनका ने अपनी पोस्ट में सवाल किया कि क्या भारतीय कंपनियों में भी ‘अनहैप्पी लीव पॉलिसी’ की जरूरत है या फिर कार्यस्थल को बेहतर बनाने का कोई दूसरा तरीका होना चाहिए, ताकि कर्मचारियों का खुद काम पर आने का मन करे।
उनकी पोस्ट के बाद वर्क-लाइफ बैलेंस, मानसिक स्वास्थ्य और कंपनियों की पारंपरिक लीव पॉलिसी को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
क्या है चीन की ‘अनहैप्पी लीव पॉलिसी’?
इस पॉलिसी की शुरुआत चीन के हेनान प्रांत की रिटेल चेन पैंग डोंग लाई से जुड़ी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 चाइना सुपरमार्केट वीक के दौरान कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन यू डोंगलाई ने कहा था कि अगर कर्मचारी मानसिक या भावनात्मक रूप से ठीक महसूस नहीं कर रहे हैं, तो वे वेतन सहित छुट्टी ले सकते हैं।
कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों को नाखुश होने के बावजूद काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय वे छुट्टी लेकर बेहतर महसूस करने के बाद काम पर लौट सकते हैं।
छुट्टी से आगे वर्कप्लेस के माहौल की बात
हर्ष गोयनका की पोस्ट के बाद सवाल सिर्फ एक नई छुट्टी की कैटेगरी का नहीं रह गया है। चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि कंपनियां ऐसा माहौल कैसे बनाएं, जहां कर्मचारियों पर तनाव कम हो और वे काम पर आने में सहज महसूस करें।
भारत में ऐसी पॉलिसी लागू होगी या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन इस विचार ने कर्मचारी कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर वर्कप्लेस को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

