
तेल सप्लाई के तीन अहम रूट्स पर संकट, क्या दुनिया में आने वाला है नया ऑयल कोहराम?
तेल सप्लाई के अहम रास्तों पर बढ़ते संकट ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच कई बड़े संकेत सामने आए हैं। आखिर किन वजहों से बढ़ रहा है ग्लोबल ऑयल संकट और इसका असर किन देशों पर पड़ सकता है, जानिए पूरी कहानी।

In Short
- होर्मुज स्ट्रेट, बाब-अल-मंदेब और सऊदी पाइपलाइन पर संकट से बढ़ी तेल सप्लाई की चिंता
- सऊदी अरब का तेल उत्पादन 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचा
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा
दुनिया में एक बार फिर तेल संकट का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। कच्चे तेल की सप्लाई के तीन बड़े रास्तों में रुकावट आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो तेल आयात पर निर्भर देशों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल जरूरत पूरी करने वाला होर्मुज स्ट्रेट पहले से ही बंद है। वहीं, हूती विद्रोही बाब-अल-मंदेब पर लगातार हमलों के जरिए दबाव बढ़ा रहे हैं। दूसरी तरफ सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद उसका प्रमुख वैकल्पिक तेल मार्ग भी बंद हो गया है।
सऊदी अरब की पाइपलाइन पर बड़ा झटका
होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब के बाद अब सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर संकट ने चिंता बढ़ा दी है। ड्रोन हमलों के चलते इस पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश के पास मौजूद तेल निर्यात भंडार पर दबाव बढ़ गया है।
सऊदी अरब की यह करीब 1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला अहम रास्ता है। यह अरब प्रायद्वीप के पार लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक रोजाना करीब 40 लाख बैरल तेल पहुंचाने की क्षमता रखती है।
तेल सप्लाई में गिरावट के संकेत
तेल उत्पादन के आंकड़े भी बढ़ते संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। 11 सितंबर को ओपेक को ब्रिटेन की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, तेल उत्पादन में महीने-दर-महीने करीब 19 लाख बैरल प्रति दिन की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
अगस्त में सऊदी अरब का कच्चे तेल का उत्पादन घटकर 62.40 लाख बैरल प्रति दिन रह गया, जो 1990 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया है। उत्पादन में आई इस गिरावट ने ऊर्जा बाजारों की चिंता और बढ़ा दी है।

दुनिया के ऊर्जा बाजारों पर असर
सऊदी अरब के यानबू क्षेत्र में अनुमानित 3.5 करोड़ बैरल तेल क्षमता में से केवल पांच से सात दिनों का निर्यात स्टॉक बचा होने की बात सामने आई है। वहीं, मिस्र के ऐन सुखना और सिदी केरीर बंदरगाहों पर अतिरिक्त रिजर्व से कुछ और दिनों का ही सहारा मिल सकता है।
हालांकि, रियाद की ओर से नुकसान की पूरी जानकारी अभी साझा नहीं की गई है, जिससे ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तीनों प्रमुख तेल रास्तों में रुकावट का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल, WTI क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल और मर्बन क्रूड करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
इसके साथ ही नेचुरल गैस की कीमतों में भी करीब 2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। तेल की सप्लाई में कमी से वैश्विक ईंधन लागत बढ़ने और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुमान के मुताबिक, इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में 57 लाख बैरल प्रति दिन की कमी आ सकती है। इसका असर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है।

