अंडमान में छिपा है भारत का ऊर्जा खजाना? ONGC ने बताई बड़ी संभावनाएं
बिजनेस टुडे के इंडिया्स मोस्ट सस्टेनेबल कंपनीज 2026 समिट में एक्सपर्ट्स ने कहा कि भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल, गैस और रिन्यूएबल एनर्जी के बीच संतुलन जरूरी है। उन्होंने घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, गैस नेटवर्क विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा में निवेश तेज करने पर जोर दिया।

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति सबसे बड़ी जरूरतों में से एक बन गई है। बिजनेस टुडे इंडिया के मोस्ट सस्टेनेबल कंपनीज समिट एंड अवॉर्ड्स में उद्योग जगत के दिग्गजों ने इस बात पर जोर दिया कि देश को भविष्य की ऊर्जा मांग पूरी करने के लिए पारंपरिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलित रणनीति अपनानी होगी।
ओएनजीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रत्नेश कुमार ने कहा कि भारत आज भी ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर है। देश की लगभग 90% तेल जरूरतें विदेशों से पूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि सस्ते और आसानी से उपलब्ध तेल का दौर अब खत्म हो चुका है, इसलिए डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
अंडमान और पूर्वी तट पर टिकी उम्मीदें
रत्नेश कुमार के मुताबिक अंडमान क्षेत्र में तेल और गैस की खोज की बड़ी संभावनाएं हैं। ओएनजीसी और रिलायंस जैसी कंपनियां इन अवसरों की तलाश में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि भारत के कुल नैचुरल गैस प्रोडक्शन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पूर्वी तट से आता है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल देश के ऊर्जा मिश्रण में जीवाश्म ईंधनों की हिस्सेदारी करीब 82% है, जबकि रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी लगभग 18% है। हालांकि सरकार की आक्रामक नीतियों के चलते भारत 50% से अधिक रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल कर चुका है।
तेल और गैस के साथ बढ़ेगा ग्रीन एनर्जी निवेश
बीपीसीएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एम. शंकर ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा। उनके अनुसार भारत को घरेलू तेल और गैस संसाधनों की खोज जारी रखनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश भी बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख तेल कंपनियों को अब रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में विस्तार का स्पष्ट लक्ष्य दिया गया है।
बढ़ती मांग के लिए तैयार हो रहा गैस नेटवर्क
पीएनजीआरबी के सस्टेनेबिलिटी डायरेक्टर मनीष डेविड सिंह ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के साथ देश की ऊर्जा जरूरतें भी तेजी से बढ़ेंगी। उन्होंने बताया कि वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बावजूद सरकार और घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से एलपीजी जैसी आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बनाए रखी गई।
उन्होंने कहा कि भारत का गैस नेटवर्क तेजी से विस्तारित हुआ है। देश में 307 भौगोलिक क्षेत्रों तक गैस नेटवर्क पहुंच चुका है और लाखों घर पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से जुड़े हैं। उनके मुताबिक भविष्य में कंप्रेस्ड बायोगैस, हाइड्रोजन, पवन और सौर ऊर्जा भी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
स्वच्छ ऊर्जा के साथ नई निर्भरता का खतरा
आईईईएफए की लीड क्लीन एनर्जी स्पेशलिस्ट सलोनी सचदेवा माइकल ने कहा कि परिवहन जैसे क्षेत्र तेजी से बिजली आधारित हो रहे हैं और सौर ऊर्जा भारत की नवीकरणीय क्षमता का बड़ा हिस्सा बन चुकी है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर बढ़ती निर्भरता नई चुनौती बन सकती है।

