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दुनिया का 70% कोयला सिर्फ इन दो देशों ने किया इस्तेमाल, रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ती दुनिया में कोयले की पकड़ कमजोर नहीं हुई है। साल 2025 के आंकड़ों ने दिखाया कि कुछ देशों की जरूरत ने ग्लोबल डिमांड का पूरा गणित बदल दिया। कौन से देश सबसे आगे रहे और बाकी दुनिया उनसे कितनी पीछे है, जानिए पूरी रिपोर्ट में।

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In Short

  • चीन और भारत ने मिलकर 2025 में दुनिया के करीब 70% कोयले का इस्तेमाल किया।
  • चीन अकेले 55.6% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा कोयला उपभोक्ता रहा, जबकि भारत करीब 14% के साथ दूसरे नंबर पर रहा।
  • 2025 में ग्लोबल कोल डिमांड बढ़ाने में साउथईस्ट एशिया और अमेरिका की बड़ी भूमिका रही, जबकि यूरोप में खपत घटी।

दुनिया भर में बिजली बनाने के साफ तरीकों को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन कोयले की जरूरत अब भी खत्म नहीं हुई है। बिजली बनाने, फैक्ट्रियां चलाने और बढ़ती आबादी की जरूरत पूरी करने के लिए कई देश आज भी कोयले पर निर्भर हैं।

कहीं इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है, तो कहीं लगातार घट रहा है। अब सवाल है कि 2025 में कोयले के इस्तेमाल में कौन से देश सबसे आगे रहे?

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चीन और भारत ने इस्तेमाल किया 70% कोयला

एनर्जी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 2025 में 92.2 एक्साजूल कोयले का इस्तेमाल किया। यह दुनिया में इस्तेमाल हुए कुल कोयले का 55.6 प्रतिशत था। यानी चीन ने भारत के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा कोयला इस्तेमाल किया।

भारत 23.1 एक्साजूल कोयले की खपत के साथ दूसरे नंबर पर रहा। दुनिया के कुल कोयले के इस्तेमाल में भारत की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत रही। इस तरह चीन और भारत ने मिलकर दुनिया का करीब 70 प्रतिशत कोयला इस्तेमाल किया।

भारत में कोयले की जरूरत काफी ज्यादा है, लेकिन चीन में बिजली, फैक्ट्रियों और सामान बनाने वाले सेक्टर का आकार बहुत बड़ा है। इसी वजह से वहां कोयले का इस्तेमाल भी ज्यादा होता है। अब सवाल है कि चीन और भारत के बाद बाकी देश कितने पीछे हैं?

अमेरिका तीसरे नंबर पर लेकिन चीन से बहुत पीछे

अमेरिका 8.7 एक्साजूल कोयले के इस्तेमाल के साथ दुनिया में तीसरे नंबर पर रहा। इंडोनेशिया ने 5.2 एक्साजूल कोयला इस्तेमाल किया और वह चौथे नंबर पर रहा। जापान 4.4 एक्साजूल के साथ पांचवें नंबर पर रहा।

अमेरिका, इंडोनेशिया और जापान ने मिलकर जितना कोयला इस्तेमाल किया, वह भी चीन के कुल इस्तेमाल के पांचवें हिस्से से कम रहा। इससे साफ है कि दुनिया में कोयले की कुल मांग में चीन का हिस्सा कितना बड़ा है। हालांकि, 2025 में कोयले की मांग बढ़ने के पीछे केवल चीन ही नहीं था।

साउथईस्ट एशिया ने बढ़ाई ग्लोबल डिमांड

साल 2025 में दुनिया में कोयले की मांग बढ़ी। हालांकि, चीन और भारत में कोयले से बनने वाली बिजली का प्रोडक्शन 50 साल से ज्यादा समय में पहली बार कम हुआ। इसके बाद भी साउथईस्ट एशिया के तेजी से बढ़ते देशों में कोयले की जरूरत बढ़ती रही, जिससे ग्लोबल डिमांड ऊपर बनी रही।

इंडोनेशिया और वियतनाम ने बिजली की बढ़ती जरूरत पूरी करने के लिए कोयले से चलने वाले पावर प्लांट बढ़ाए हैं। इन दोनों देशों में कोयले का इस्तेमाल 2015 के मुकाबले दोगुने से ज्यादा हो चुका है। इंडोनेशिया अब दुनिया का चौथा और वियतनाम नौवां सबसे बड़ा कोयला इस्तेमाल करने वाला देश बन गया है। वहीं, अमेरिका में भी 2025 के दौरान कोयले की मांग में बड़ा बदलाव आया।

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अमेरिका में बढ़ी मांग यूरोप में गिरावट

अमेरिका में 2025 के दौरान कोल कंजम्प्शन 10 प्रतिशत बढ़ा। यह सालाना आधार पर कोयले के इस्तेमाल में हुई सबसे बड़ी वापसी में से एक रही।

दूसरी ओर, यूरोप की कई एडवांस्ड इकॉनमी में कोल प्लांट बंद होने और रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ने से मांग लगातार घटी। जर्मनी, पोलैंड और चेकिया अब भी यूरोप के बड़े कोल कंज्यूमर हैं, लेकिन ज्यादातर यूरोपीय देशों की ग्लोबल डिमांड में हिस्सेदारी बहुत छोटी है।

एशिया के कई देशों में कोयला अब भी मैन्युफैक्चरिंग, अर्बनाइजेशन और बढ़ती बिजली की जरूरत पूरी करने का सस्ता और भरोसेमंद एनर्जी सोर्स बना हुआ है।