
₹1,200 करोड़ के क्लेम अटके! हरियाणा में आयुष्मान सेवाओं पर फिर संकट, निजी अस्पतालों ने दी हड़ताल की चेतावनी
हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर निजी अस्पतालों और सरकार के बीच विवाद फिर गहरा गया है। भुगतान को लेकर डॉक्टरों ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों बार-बार उठ रहा है क्लेम का मुद्दा? जानिए इस रिपोर्ट में।

In Short
- IMA हरियाणा ने लंबित भुगतान पर 1 सितंबर की हड़ताल घोषित की
- निजी अस्पतालों के करीब 1,200 करोड़ रुपये के क्लेम पेंडिंग बताए गए
- पानीपत में अकेले 80 करोड़ रुपये के क्लेम लंबित होने का दावा
हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर निजी अस्पतालों और राज्य सरकार के बीच एक बार फिर विवाद बढ़ गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) हरियाणा ने लंबित भुगतान को लेकर 1 सितंबर को 24 घंटे के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत सेवाएं बंद रखने का ऐलान किया है।
IMA का कहना है कि योजना के तहत निजी अस्पतालों के करीब 1200 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान अभी तक लंबित है। एसोसिएशन ने सरकार से बकाया राशि जारी करने के साथ क्लेम भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की मांग की है।
निजी अस्पतालों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
करनाल में IMA प्रवक्ता डॉ. कमल चराया ने कहा कि एसोसिएशन के आह्वान पर आयुष्मान भारत से जुड़े सभी निजी अस्पताल एक दिन के लिए सेवाएं बंद रखेंगे। उन्होंने कहा कि अस्पतालों का करोड़ों रुपये का भुगतान अटका हुआ है और सरकार को बकाया राशि जारी करने के लिए समय दिया गया है।
डॉ. चराया ने बताया कि अगर भुगतान में लगातार देरी होती रही तो छोटे निजी अस्पतालों के लिए काम करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ अस्पताल बंद होने की स्थिति तक पहुंच सकते हैं। आगे की रणनीति पर 15 सितंबर को फैसला लिया जाएगा।
पानीपत में 80 करोड़ रुपये के क्लेम लंबित होने का दावा
पानीपत में भी निजी अस्पतालों ने भुगतान को लेकर चिंता जताई है। IMA के जिला अध्यक्ष डॉ. हेमेंद्र मंगल ने दावा किया कि जिले के निजी अस्पतालों के करीब 80 करोड़ रुपये के क्लेम लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि भुगतान नहीं होने से अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कुछ अस्पताल बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहती है कि निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत इलाज जारी रखें तो लंबित राशि का भुगतान करना होगा।
IMA ने चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 16 सितंबर से आयुष्मान सेवाएं दोबारा बंद की जा सकती हैं। हालांकि इमरजेंसी मरीजों को भर्ती किया जाएगा, लेकिन नए नियमित आयुष्मान मरीजों को इलाज नहीं दिया जाएगा।

पहले भी हो चुका है सेवाएं बंद करने का फैसला
हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुका है। जनवरी से अप्रैल के बीच IMA ने सितंबर 2025 से लंबित भुगतान को लेकर योजना से हटने की चेतावनी दी थी।
जून में करीब 600 निजी अस्पतालों ने 400 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित बकाये और आयुष्मान भारत व चिरायु हरियाणा योजना के पैकेज रेट को लेकर कई दिनों तक सेवाएं बंद रखी थीं।
इसके बाद 7 से 26 अगस्त तक करीब 650 सूचीबद्ध निजी अस्पतालों ने 19 दिनों तक आयुष्मान सेवाएं बंद रखीं। बाद में सरकार और अस्पतालों के बीच सहमति बनने के बाद सेवाएं फिर शुरू हुई थीं।
सरकार ने बिलों में गड़बड़ी का दिया हवाला
इस मामले पर विपक्ष ने हरियाणा सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेताओं ने आयुष्मान मरीजों की समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।
वहीं मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली ने कहा कि कुछ अस्पतालों के बिलों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां कोई कमी है, वहां मुख्यमंत्री खुद मामले को देख रहे हैं।
अब सभी की नजर 1 सितंबर को होने वाली 24 घंटे की सेवा बंदी और सरकार के अगले कदम पर है। साथ ही यह भी देखना होगा कि 16 सितंबर की समयसीमा से पहले भुगतान विवाद का समाधान हो पाता है या नहीं।

