भारत में स्टील पर बड़ा दांव: आंध्र प्रदेश में ₹70,000 करोड़ निवेश, इंफ्रा से सोलर तक बढ़ेगी मांग
ArcelorMittal Nippon Steel ने भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ पर बड़ा भरोसा जताया है। कंपनी आंध्र प्रदेश में ₹70,000 करोड़ का निवेश कर रही है जबकि Hazira में भी करीब इतनी ही रकम लगा चुकी है। कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर ऑटोमोबाइल सोलर एनर्जी और हाई क्वालिटी स्टील की बढ़ती डिमांड में बड़ा मौका दिख रहा है।

भारत में मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बदल रहा है। आने वाले वर्षों में ऑटोमोबाइल से लेकर सोलर एनर्जी और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तक बेहतर क्वालिटी के स्टील की जरूरत और बढ़ने वाली है। इसी बढ़ती जरूरत को देखते हुए ArcelorMittal Nippon Steel India देश में बड़े स्तर पर इन्वेस्टमेंट कर रही है। कंपनी का मानना है कि भारत की ग्रोथ स्टोरी अभी लंबी है और इसी भरोसे के पीछे कई बड़े कारण हैं।
आंध्र प्रदेश में ₹70,000 करोड़ का नया इन्वेस्टमेंट
ArcelorMittal Nippon Steel India के मुताबिक कंपनी आंध्र प्रदेश में करीब ₹70,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट कर रही है। हालांकि भारत में कंपनी का बड़ा दांव इससे पहले ही शुरू हो चुका था। Hazira में अधिग्रहण के बाद कंपनी करीब इतनी ही रकम यानी ₹70,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट कर चुकी है। कंपनी ने बताया कि अधिग्रहण की वैल्यू भी करीब 7 से 8 बिलियन डॉलर थी। इस तरह भारत में कंपनी की मौजूदगी सिर्फ एक प्लांट तक सीमित नहीं है बल्कि यह लंबी अवधि की बड़ी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का हिस्सा है।
भारत की ग्रोथ पर क्यों है इतना भरोसा
कंपनी का कहना है कि भारत में कई चीजें पहले से सही दिशा में हैं जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी और सुधार की जरूरत है। इसके बावजूद भारत जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है उससे कंपनी को बड़ा मौका दिखाई दे रहा है। India@100 यानी 2047 तक देश को बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल कैपेसिटी की जरूरत होगी। इन सभी सेक्टर्स में स्टील बेसिक रॉ मटेरियल है लेकिन अब जरूरत सिर्फ सामान्य स्टील की नहीं बल्कि उसी क्वालिटी की है जिसका इस्तेमाल डेवलप्ड मार्केट्स में होता है।
चिनाब ब्रिज से दिखा हाई क्वालिटी स्टील का असर
कंपनी ने भारत में अपने स्टील के इस्तेमाल का उदाहरण जम्मू-कश्मीर के Chenab Bridge से दिया। कंपनी के अनुसार इस ब्रिज में इस्तेमाल हुए स्टील का करीब 70 प्रतिशत Hazira से सप्लाई किया गया। कंपनी ने एक दूसरे ब्रिज Langje Bridge का भी जिक्र किया जहां स्टील की सप्लाई कंपनी की ओर से की गई। कंपनी का मानना है कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट दिखाते हैं कि भारत में एडवांस्ड और हाई क्वालिटी स्टील की डिमांड लगातार बढ़ रही है।
सोलर सेक्टर में कम हुई इंपोर्ट पर निर्भरता
कंपनी ने Magnelis नाम के एक प्रोडक्ट को भी भारत में उपलब्ध कराया है जिसका इस्तेमाल सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में होता है। कंपनी के मुताबिक पहले भारत इस तरह के स्टील के लिए 100 प्रतिशत इंपोर्ट पर निर्भर था। अब इसका प्रोडक्शन भारत में ही हो रहा है। इससे सोलर पार्क और दूसरे रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी स्टील देश में उपलब्ध हो रहा है और सोलर सेक्टर की ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है।
ऑटोमोबाइल की बदलती जरूरत के साथ बदला स्टील
भारत के ऑटोमोबाइल मार्केट में पिछले सात से आठ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। प्रीमियम गाड़ियों की बिक्री बढ़ी है और भारत अब ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट के लिए भी एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कंपनी का कहना है कि जब गाड़ियों की टेक्नोलॉजी और क्वालिटी बदलती है तो उनमें इस्तेमाल होने वाले स्टील को भी बदलना पड़ता है। इसी जरूरत के हिसाब से कंपनी भारत में नए ग्रेड और बेहतर क्वालिटी का स्टील उपलब्ध करा रही है।
300 मिलियन टन का लक्ष्य अब नहीं लगता नामुमकिन
कंपनी ने 2017 में लॉन्च हुई नेशनल स्टील पॉलिसी का भी जिक्र किया जिसमें 2030 तक 300 मिलियन टन की स्टील कैपेसिटी का लक्ष्य रखा गया था। उस समय कई लोगों को यह लक्ष्य मुश्किल और लगभग नामुमकिन लगा था। कंपनी का कहना है कि अब 2030 में करीब चार साल बाकी हैं और देश इस लक्ष्य के काफी करीब पहुंच रहा है। उसके मुताबिक मजबूत इरादा बेहतर पॉलिसी सपोर्ट और लगातार इन्वेस्टमेंट बना रहा तो भारत का स्टील सेक्टर आगे भी तेज रफ्तार से बढ़ सकता है।

