scorecardresearch

1991 की 'LPG पीढ़ी' से आज की 'Gen-Z' तक: 35 साल में कितने बदल गए भारतीय युवाओं के सपने?

साल 1991 में आज ही के दिन देश में LPG यानी उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization) सुधार लागू किए गए थे। इन आर्थिक सुधारों के आज 35 साल पूरे हो गए हैं।

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • 1991 के LPG सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा बदली, आज इसके 35 साल पूरे हुए।
  • सरकारी नौकरी की सोच से आगे बढ़कर आज युवा स्टार्टअप, टेक और ग्लोबल करियर की ओर बढ़ रहे हैं।
  • केबल टीवी से क्विक कॉमर्स तक, 35 साल में भारतीय मध्यम वर्ग की जीवनशैली और सपने दोनों बदले।

35 Years of Economic Reforms: भारत की अर्थव्यवस्था के इतिहास में आज यानी 24 जुलाई का दिन बेहद अहम माना जाता है। साल 1991 में आज ही के दिन देश में LPG यानी उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization) और वैश्वीकरण (Globalization) सुधार लागू किए गए थे। इन आर्थिक सुधारों के आज 35 साल पूरे हो गए हैं।

advertisement

गंभीर आर्थिक संकट के बीच शुरू हुए इन सुधारों ने आगे चलकर न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा बदली, बल्कि देश के मध्यम वर्ग की सोच, जीवनशैली और सपनों पर भी बड़ा असर डाला।

सरकारी नौकरी से स्टार्टअप तक बदली सोच

1990 से पहले की पीढ़ी के लिए करियर का मतलब काफी हद तक एक सुरक्षित सरकारी नौकरी माना जाता था। नौकरी की सुरक्षा और नियमित कमाई सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। लेकिन 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद देश में निजी कंपनियों और नए सेक्टर्स के लिए रास्ते खुलने लगे। इसके साथ युवाओं के सामने करियर के नए विकल्प भी आए।

ये खबर पढ़ना ना भूलें: सोना गिरवी रखने की नौबत से डिजिटल इंडिया तक! LPG सुधारों के 35 साल, जानिए कितनी बदल गई भारतीय अर्थव्यवस्था

आज की Gen-Z की तस्वीर इससे काफी अलग है। युवा अब केवल पारंपरिक नौकरियों तक सीमित नहीं हैं। स्टार्टअप शुरू करना, कंटेंट क्रिएटर बनना और ग्लोबल एक्सपोजर हासिल करना भी उनके करियर और सपनों का हिस्सा बन चुका है।

केबल टीवी से 10 मिनट की डिलीवरी तक

आर्थिक सुधारों के बाद भारतीय बाजार में मल्टीनेशनल कंपनियों और ग्लोबल ब्रांड्स की एंट्री बढ़ी। केबल टीवी ने भारतीय परिवारों को दुनिया के नए ट्रेंड्स और प्रोडक्ट्स से रूबरू कराया। इससे लोगों की खरीदारी की आदतों और जीवनशैली में भी बदलाव आया।

35 साल बाद उपभोक्ताओं की उम्मीदें और आगे निकल चुकी हैं। आज ऑनलाइन शॉपिंग और क्विक-कॉमर्स का दौर है, जहां ग्राहक घर बैठे सामान ऑर्डर कर सकता है और कई चीजें 10 मिनट में पहुंचने की उम्मीद करता है।

छोटे शहरों के युवाओं के सपने भी हुए बड़े

1991 के बाद आए बदलाव का असर केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहा। धीरे-धीरे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी नए अवसर पहुंचे। आज इन शहरों के युवा आईटी, फिनटेक और एंटरप्रेन्योरशिप जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं।

यानी 1991 के आर्थिक सुधारों ने केवल बाजार नहीं खोला, बल्कि भारतीय मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं का दायरा भी बढ़ाया। सरकारी नौकरी और सीमित विकल्पों वाले दौर से निकलकर आज की Gen-Z ग्लोबल करियर, टेक्नोलॉजी और अपना कारोबार खड़ा करने जैसे बड़े सपने देख रही है।