Budget 2025 Expectation: UPI से डिजिटल क्रांति, भारतीय व्यापार और MSMEs को आगामी बजट से ये हैं उम्मीदें
अगले महीने पेश होने वाले बजट में लोगों को उम्मीद है कि सरकार यूपीआई से संबंधित फैसले ले सकती हैं। नीचे जानते हैं कि आगामी बजट में यूपीआई और MSME को लेकर क्या उम्मीदें हैं।

भारत में बैंकिंग की क्रांति ने एक शानदार बदलाव देखा गया है। UPI (Unified Payments Interface) और ऑनलाइन भुगतान के जरिए ऑनलाइन बैंकिंग काफी बदलाव देखने को मिला है। कई साल पहले बैंकिंग सेवाएं केवल फिजिकल बैंक ब्रांच, पासबुकों और लंबी प्रोसेस पर निर्भर करती थीं। इसके बाद, बैंकिंग बिनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) मॉडल आया, जिससे वित्तीय लेन-देन घर तक पहुंच गया। ATM, नेट बैंकिंग, BC मॉडल और मोबाइल बैंकिंग की शुरुआत ने मॉडर्नाइजेशन की दिशा में पहला कदम उठाया।
2016 में UPI का लॉन्च भारत में एक गेम-चेंजर साबित हुआ, जिससे लेन-देन तुरंत होने लगा। UPI की सरलता, इंटरऑपरेबिलिटी और पहुंच ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया, खासकर ग्रामीण इलाकों में। आजकल, ऑनलाइन भुगतान दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। अगले महीने पेश होने वाले बजट में लोगों को उम्मीद है कि सरकार यूपीआई से संबंधित फैसले ले सकती हैं। नीचे जानते हैं कि आगामी बजट में यूपीआई और MSME को लेकर क्या उम्मीदें हैं।
आने वाले बजट के लिए, श्री समीर माथुर, फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर, Roinet Solution ने सुझाव दिया है कि सरकार को UPI लेन-देन के लिए नए प्रवेशकों को कुछ प्रोत्साहन देने चाहिए। इससे ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान की पैठ को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक गतिविधियों में सुधार होगा।
वहीं, श्री अभिषेक सक्सेना, MD और को-फाउंडर, Omnicard, का मानना है कि आगामी बजट में UPI के फोकस को उद्यमों की ओर मोड़ने की आवश्यकता है। वर्तमान में भारत के केवल 6.3% व्यवसाय ही डिजिटल हैं, यानी 93.8% अभी भी ऑफलाइन काम करते हैं। यह एक याद दिलाने वाली बात है कि यहां एक विशाल अज्ञात क्षमता मौजूद है। UPI ने उपभोक्ता भुगतान को बदल दिया है, अब इसे छोटे और मंझोले व्यवसायों (MSMEs) के लिए भी लागू करने की जरूरत है। इसके अलावा, MSMEs के लिए क्रेडिट और पूंजी तक आसान पहुंच, टैक्स सुधार और अनुपालन में ढील से छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और वे प्रतिस्पर्धात्मक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेंगे।
